
नई दिल्ली। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले (Nana Patole) ने केंद्र सरकार द्वारा प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीकी देश नामीबिया से चीता लाने को लेकर भी राजनीति खोज ली। उन्होंने चीता लाने को भारत में लम्पी वायरस (lumpy virus) फैलने और गायों की मौत से जोड़ दिया।
बेतुका बयान देते वक्त नाना पटोले ने देश के नाम में भी गलती कर दी। चीतों को नामीबिया से लाया गया था, लेकिन पटोले नामीबिया की जगह नाइजीरिया कह बैठे। यहां तक कि उन्होंने लम्पी वायरस के शिकार गाय के शरीर पर उगने वाले बड़े-बड़े गोल फोड़ों की तुलना चीता के शरीर पर मौजूद काले गोल घेरे वाले पैटर्न से कर दी।
सरकार ने जानबूझकर किया किसानों का नुकसान
नाना पटोले ने कहा, "लम्पी रोग नाइजीरिया करके एक देश है, वहां पर ये कई सालों से था। ये चीता भी जो लाया गया है, उधर से ही लाया गया है। चीते के चिट्ठे और गाय के चिट्ठे दोनों समान आते हैं। केंद्र की सरकार ने जानबूझकर किसानों का नुकसान करने के लिए ये व्यवस्था बनाई है।"
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नामीबिया से लाए गए थे चीते
गौरतलब है कि 17 सितंबर को भारत में 70 साल बाद चीतों की वापसी हुई थी। 1952 में इन्हें भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़ा था। नामीबिया से आठ चीतों को विमान से ग्वालियर लाया गया था। इसके बाद उन्हें हेलिकॉप्टर से कूनो पहुंचाया गया था।
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