
Belagavi dispute: कर्नाटक सरकार अपना शीतकालीन सत्र विवादित बेलगावी में आयोजित की है। राज्य के दूसरे विधानसभा में आयोजित विधानसभा सत्र से महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमाक्षेत्र विवाद और गरमा गया है। बीएस बोम्मई सरकार के इस अंतिम शीतकालीन सत्र के आयोजन से दोनों प्रदेशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। राज्य सरकार दस दिनों का विधानसभा सत्र आहूत की है। हंगामा को देखते हुए बेलगावी और आसपास का क्षेत्र अभेद्य किले में तब्दील हो चुका है। चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात है। विरोध प्रदर्शन करने पहुंच रहे एनसीपी, शिवसेना के नेताओं-कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया है।
बेलगावी पहुंचने की कोशिश में एनसीपी-शिवसेना के नेता अरेस्ट
एनसीपी के हसन मुश्रीफ और शिवसेना के कोल्हापुर जिला अध्यक्ष विजय देवाने को सोमवार को कर्नाटक के बेलगावी में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए हिरासत में लिया गया। शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के सैकड़ों सदस्यों को सीमा पर रोक दिया गया। कर्नाटक के सुरक्षाकर्मियों ने इन लोगों को बार्डर पर ही रोक दिया और घुसने नहीं दिया। जबकि तमाम एनसीपी व शिवसेना कार्यकर्ताओं को महाराष्ट्र पुलिस ने ही हिरासत में ले लिया था।
कर्नाटक पुलिस ने दी चेतावनी
कर्नाटक के एडीजी लॉ एंड आर्डर आलोक कुमार ने कहा कि अगर कर्नाटक में महाराष्ट्र के सांसद के आगमन से कानून और व्यवस्था को खतरा होता है तो हम कार्रवाई शुरू करेंगे। उन्हें बेलगावी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्हें सीमा पर रोक दिया जाएगा और वापस भेज दिया जाएगा। दरअसल, धैर्यशील संभाजीराव माने, एमएमईएस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने वाले थे लेकिन अनुमति नहीं दी गई। पुलिस ने कहा कि यह संभावना है कि वह भड़काऊ भाषण दे सकते हैं जिससे भाषाई संघर्ष होगा और कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा होगी।
बेलगावी में भारी पुलिस फोर्स तैनात
बेलगावी में तनाव को देखते हुए राज्य पुलिस ने छह पुलिस अधीक्षकों, 11 अतिरिक्त अधीक्षकों, 43 उप-अधीक्षकों, 95 पुलिस निरीक्षकों, 241 पुलिस उप-निरीक्षकों सहित 4,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है।
कांग्रेस ने कहा-केंद्र सरकार ने गरमाया है मुद्दा
महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने पीएम नरेंद्र मोदी पर भारत को विभाजित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार चुनाव को देखते हुए विवाद पैदा कराने की कोशिश में लगी हुई है। केंद्र सरकार के कारण सीमा का मुद्दा हो रहा है। पीएम मोदी महाराष्ट्र को विभाजित करना चाहते हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों और गृह मंत्री अमित शाह के बीच बैठक के बावजूद नेताओं को वहां जाने की अनुमति क्यों नहीं है? इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार इसके पीछे है।
शिंदे बोले-महाराष्ट्र के गौरव से समझौता नहीं, कर्नाटक बोला-कोई क्षेत्र नहीं दिया जाएगा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सीएम एकनाथ शिंदे ने सोमवार को कहा कि यह महाराष्ट्र के गौरव का मुद्दा है और राज्य ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। गृह मंत्री ने खुद इस मुद्दे के बारे में मीडिया को सूचित किया। महाराष्ट्र एकीकरण समिति आज विरोध कर रही है, इस मुद्दे पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। कई अन्य मुद्दे हैं जिन पर हम राजनीति कर सकते हैं। उधर, कर्नाटक का कहना है कि सीमांकन अंतिम है और इसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता है। जो क्षेत्र हमारे राज्य में है हमारा ही रहेगा।
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