
नई दिल्ली: महुआ मोइत्रा के खिलाफ उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी का एफिडेविट सामने आने के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। उधर, लोकसभा स्पीकर द्वारा इस मामले को एथिक्स कमेटी को भेजे जाने के बाद संसदीय जांच समिति ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने बताया कि उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी का हलफनामा कमेटी को मिला है। कमेटी को एफिडेविट में बताया गया है कि हीरानंदानी ने संसद में सवाल पूछने के लिए टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को रिश्वत दी थी। कमेटी सभी आरोपों की व्यापक जांच करेगी।
एथिक्स कमेटी के प्रमुख विनोद सोनकर ने बताया कि हमें दर्शन हीरानंदानी का हलफनामा मिला है। कमेटी बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत पर 26 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। दुबे को कमेटी के सामने सारे सबूत पेश करने के लिए कहा गया है। सोनकर ने कहा कि समिति पहले दुबे के पत्र और हीरानंदानी के शपथ पत्र की जांच करेगी। इसके बाद हम महुआ मोइत्रा का पक्ष सुनेंगे जिन्होंने आरोपों का सख्ती से खंडन किया है और कहा है कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।
एफिडेविट में दर्शन हीरानंदानी ने लगाए हैं गंभीर आरोप
एफिडेविट में दर्शन हीरानंदानी ने दावा किया कि उन्होंने सांसद महुआ मोइत्रा को उनकी संसद लॉगिन क्रेडेंशियल प्राप्त करने और सदन में प्रश्न पूछने के लिए रिश्वत दी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह अडानी समूह पर इसलिए हमला करना चाहती थीं ताकि वह प्रसिद्ध हो सकें।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर से की शिकायत
भाजपा के निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने आरोप लगाते हुए तृणमूल नेता पर संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन, सदन की अवमानना और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ओर गौतम अडाणी को बदनाम करने के लिए महुआ मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछे। सवाल पूछने के लिए उन्होंने दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत ली थी। निशिकांत दुबे के आरोप के बाद लोकसभा स्पीकर ने मामले की जांच को एथिक्स कमेटी को भेज दिया था।
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