
Bangladesh to release 95 fishermen: गलती से बांग्लादेश की सीमा में पकड़े गए 95 भारतीय मछुआरों को वहां की सरकार ने रिहा कर सुपुर्द कर दिया है। इसके बदले में नई दिल्ली ने बांग्लादेश के 90 मछुआरों को रिहा किया। उधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने यह ऐलान किया है कि वह सभी छूटे भारतीय मछुआरों को 10-10 हजार रुपये की सहायता देगी। दोनों देशों के बीच काफी दिनों से तनावपूर्ण माहौल के बीच यह फैसला सौहार्द बनाने में बड़ा कदम माना जा सकता है।
शनिवार को दोनों देशों के बीच मछुआरों का आदान-प्रदान संबंधित कोस्ट गार्ड द्वारा किया गया। इंडियन कोस्टल गार्ड और बांग्लादेशी कोस्ट गार्ड ने मछुआरों की रिहाई के बाद सुपुर्दगी सुनिश्चित की। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश ने 95 मछुआरों और चार मछली पकड़ने वाली नावों को सौंपा तो भारत ने 90 बांग्लादेशी मछुआरों को रिहा किया। बांग्लादेश के मछुआरों में मछली पकड़ने वाली कौशिक नाव के 12 मछुआरे भी शामिल थे।
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बांग्लादेश से रिहा हुए भारतीय मछुआरों को इंडियन कोस्ट गार्ड ने बाद में पश्चिम बंगाल सरकार के मत्स्य पालन अधिकारियों को सुपुर्द कर दिया। यह सुपुर्दगी 24 परगना जिला में हुई। इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी रिहा हुए मछुआरों के लिए सरकारी सहायता का ऐलान किया। ममता सरकार ने बताया कि 95 मछुआरों को 10-10 हजार रुपये की सहायता सरकार की ओर से दी जाएगी।
बांग्लादेश के उग्र आंदोलन के बाद पिछले साल 5 अगस्त 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट हो गया। उग्र आंदोलन की वजह से शेख हसीना को देख छोड़ना पड़ा था और सेना ने सत्ता को हाथ में ले लिया था। बाद में 8 अगस्त को नोबल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। शेख हसीना ने भारत में शरण ली है। उधर, अंतरिम सरकार के गठन के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा में बेतहाशा वृद्धि हुई है। कई मंदिरों को तोड़ दिया गया। वहां के इस्कॉन मंदिर के पुजारियों को अरेस्ट कर लिया गया। हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ भारत ने सख्त आपत्ति जतायी है। इस बीच बांग्लादेश के भारत स्थित उच्चायोग पर हमला के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।
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