
Mamata Banerjee Tata Meeting: टाटा के नैनो प्लांट के खिलाफ सिंगूर आंदोलन से राजनीतिक माइलेज पाने वाली ममता बनर्जी ने अब उसी टाटा के लिए अपने प्रदेश का द्वार खोल दिया है। सिंगूर आंदोलन से ममता बनर्जी ने CPI(M) शासन को चुनौती देते हुए प्रमुख विपक्षी नेता से मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया था। करीब 18 साल पहले हुए इस आंदोलन के दौरान टाटा मोटर्स ने अपनी Nano कार फैक्ट्री को बंगाल से गुजरात शिफ्ट करने का फैसला लिया था लेकिन अब बंगाल और टाटा ग्रुप के रिश्तों में एक नया अध्याय खुलता नजर आ रहा है।
2006 में ममता बनर्जी ने सिंगूर में किसानों की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ा था। उस समय ममता बनर्जी विपक्ष की बड़ी नेता होकर राज्य में उभरी थीं। उन्होंने तत्कालीन कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ झंड़ा बुलंद करते हुए सिंगूर आंदोलन को तेज किया। आलम यह कि 2008 में Ratan Tata ने घोषणा की कि Nano प्लांट बंगाल से गुजरात शिफ्ट किया जाएगा। उस समय रतन टाटा ने ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए प्लांट बंगाल से शिफ्ट करने के लिए उनको दोषी ठहराया था। ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए इसे एक व्यक्ति की दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी कहा था।
लेकिन अब 2025 में टाटा और ममता बनर्जी के बीच कड़वाहट घुलती नजर आ रही है। बुधवार को कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राज्य का दरवाजा टाटा ग्रुप के लिए खोल दिया। मुख्यमंत्री बनर्जी और Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मुलाकात कर इस पुराने विवाद को एक नए सहयोग में बदलने का संकेत दिया।
Trinamool Congress ने X (पूर्व Twitter) पर पोस्ट किया कि ममता बनर्जी ने बंगाल के औद्योगिक विकास और उभरते अवसरों पर रचनात्मक बातचीत के लिए एन. चंद्रशेखरन से बातचीत की है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टाटा संस के चेयरपर्सन एन चंद्रशेखरन के बीच बातचीत बंगाल में निवेश पर केंद्रित रहा। तय हुआ कि बंगाल में Tata Group की उपस्थिति को और बढ़ाया जाएगा। टाटा ग्रुप यहां राज्य में निवेश, इनोवेशन और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देने पर सरकार के साथ मिलकर काम करेगा। इसके अलावा टाटा के स्वामित्व वाली एयर इंडिया जल्द ही कोलकाता से यूरोप के लिए डायरेक्ट फ्लाइट्स शुरू कर सकता।
कुछ महीने पहले ममता बनर्जी ने BGBS (Bengal Global Business Summit) में कहा था कि मैंने चंद्रशेखरन से फोन पर बात की थी और वह बंगाल में आने को लेकर उत्साहित थे। मैंने उनसे कोलकाता से यूरोप के लिए फ्लाइट शुरू करने को कहा, उन्होंने ना नहीं कहा।
सिंगूर आंदोलन के कारण राजनीतिक और कॉर्पोरेट रिश्तों में आई खटास अब सौहार्द में बदलती नजर आ रही है। ये मुलाकात दर्शाती है कि बंगाल सरकार अब औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दे रही है और टाटा जैसे समूह इसमें संभावनाएं देख रहे हैं।
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