
नई दिल्ली. गुरुग्राम में जज की पत्नी और बेटे की हत्या करने के दोषी को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई गई है। जज के सुरक्षा गार्ड महिपाल ने 13 अक्टूबर 2018 को जज के बेटे और पत्नी को गोली मारी थी। पत्नी की मौत घटना के दिन ही हो गई थी, जबकि बेटे ने इलाज के दौरान 10 दिन बाद दम तोड़ दिया।
67 लोगों ने दी थी गवाही
हरियाणा के इतिहास में यह पहला मामला है, जिस मामले में लोगों ने खुद सामने आकर गवाही दी थी। इस हत्याकांड में कुल 81 लोगों ने गवाही देने के लिए नाम दर्ज कराया, जिसमें से 67 लोगों की गवाही कराई गई। एक साल के भीतर गवाही की प्रक्रिया पूरी हो गई।
दोषी ने कहा था, गलती से चली थी गोली
16 दिसंबर 2019 को आरोपी महिपाल ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा था। उसने कहा था कि कार में पेंटिंग रखने के दौरान उसे चोट लग गई थी। इससे नाराज ध्रुव ने उसे गालियां देना शुरू कर दिया था। फिर कार की चाबी मांगी। मना करने पर दोनों में गुथगुथ्था हो गई। उसी दौरान ध्रुव ने रिवाल्वर छीनने का प्रयास किया, जिसकी वजह से फायरिंग हो गई।
- सुनवाई के दौरान वकील ने दलील दी थी कि रिवॉल्वर से अचानक फायर नहीं हो सकता है। दो गोली ध्रुव को और दो गोली उनकी मां को लगी थी। यह अचानक नहीं हो सकता है।
13 अक्टूबर 2018 को क्या हुआ था?
13 अक्टूबर 2018 को मूल रूप से हिसार निवासी व जिले के तत्कालीनी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णकांत (वर्तमान में अंबाला में) की पत्नी और उनके बेटे ध्रुव को उन्हीं के गार्ड ने गोली मार दी थी। मां-बेटे सेक्टर 49 स्थित आर्केडिया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में मार्केटिंग करने पहुंचे थे। जैसे ही दोनों कॉम्प्लेक्स से बाहर आए, गार्ड ने उनपर गोली चला दी।
- वारदात के बाद आरोपी ने जज को तीन कॉल किए। इस दौरान कहा- 'मैंने तेरी पत्नी-बेटे को गोली मारी है। मेरी मां और लोगों को इसके बारे में बता देना।'
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