
Mani Shankar Aiyar new book: बयानों की वजह से सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस के सीनियर लीडर मणिशंकर अय्यर तमाम बार अपनी ही पार्टी और नेताओं को असमंजस की स्थिति में पहुंचा देते हैं। कई चुनावों में विरोधी दलों को मुद्दा देकर कांग्रेस को ही बैकफुट पर ला चुके अय्यर की किताब एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। मणिशंकर अय्यर की किताब में यह दावा किया गया है कि उनका करियर बनाने में गांधी परिवार को योगदान रहा ही है, उनका करियर भी गांधी परिवार ने ही बर्बाद कर दिया। उनको एक दशक से सोनिया गांधी से मिलने का समय नहीं दिया जा रहा। अय्यर की किताब ने एक बार फिर कांग्रेस पर वार करने का विरोधियों को मौका दे दिया है।
सीनियर कांग्रेसी मणिशंकर अय्यर ने एक न्यूज एजेंसी को दिए गए अपने इंटरव्यू में यह दावा किया है कि पिछले 10 सालों में वह सोनिया गांधी से नहीं मिल सके हैं। इस एक दशक में केवल एक बार राहुल गांधी से उनकी मुलाकात हो सकी है। हालांकि, उनका कहना है कि प्रियंका गांधी से उनकी टेलीफोन पर बात होती है। अपने करियर के उत्थान और अब हाशिए पर पहुंचने की वजहों का जिक्र करते हुए अय्यर ने कहा: इसमें गांधी परिवार की भूमिका है। मेरे जीवन की विडंबना यह है कि मेरा राजनीतिक करियर गांधी परिवार द्वारा बनाया गया और गांधी परिवार द्वारा ही बर्बाद किया गया। अय्यर ने कहा कि गांधी परिवार के सदस्यों से सीधे तौर पर संपर्क करने नहीं दिया जाता।
अय्यर ने कहा कि गांधी परिवार में प्रियंका गांधी से एक-दो मौकों पर वह मिले हैं और फोन पर बातचीत होती है। उन्होंने कहा कि प्रियंका हमेशा उनके प्रति सद्भाव रखती हैं। पिछले जून में राहुल गांधी के जन्मदिन पर शुभकामनाएं देने के लिए वह सीधे राहुल गांधी से नहीं बात कर प्रियंका गांधी के माध्यम से शुभकामनाएं प्रेषित किए थे। अय्यर ने कहा: मैंने सोचा कि चूंकि राहुल का जन्मदिन जून में था, इसलिए मैं प्रियंका गांधी से राहुल को मेरी शुभकामनाएं देने के लिए कह सकता हूं। जब प्रियंका गांधी ने पूछा कि वह खुद राहुल गांधी से बात क्यों नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि मैं निलंबित हूं और इसलिए मैं अपने नेता से बात नहीं कर सकता।
अय्यर का मानना है कि 2012 में जब कांग्रेस का खराब दौर शुरू हुआ, नेतृत्व की शून्यता उभर कर सामने आई थी क्योंकि सोनिया गांधी और डॉ.मनमोहन सिंह दोनों अस्वस्थ थे। इस दौरान पार्टी को उबारने के लिए एकमात्र नेता प्रणव मुखर्जी हो सकते थे। उनके पास न केवल पार्टी बल्कि सरकार को चलाने का करिश्मा था। अय्यर ने कहा: 2012 में हमारे साथ दो आपदाएं घटीं: एक यह कि सोनिया गांधी बहुत बीमार पड़ गईं और डॉ. मनमोहन सिंह को छह बाईपास सर्जरी करानी पड़ीं। हम सरकार और पार्टी के मुखिया के रूप में अपंग हो गए। लेकिन एक व्यक्ति था जो अभी भी ऊर्जा से भरा हुआ था, विचारों से भरा हुआ था, उसमें एक निश्चित मात्रा में करिश्मा था और वह पार्टी या सरकार या दोनों को चला सकता था। और वह व्यक्ति थे प्रणब मुखर्जी।
दरअसल, मणिशंकर अय्यर की किताब ‘अ मॉवरिक न पॉलिटिक्स’ (A Maverick in Politics) आने वाली है। यह जगरनॉट पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है। इस किताब में मणिशंकर ने तमाम घटनाओं का जिक्र किया है। मणिशंकर अय्यर, कांग्रेस के सीनियर लीडर हैं। फिलहाल वह पार्टी से सस्पेंड हैं।
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