मणिपुर में थम नहीं रही हिंसा: पैरामिलिट्री की 10 और कंपनियां भेजी गईं, पहले से ही 40 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी फील्ड में किए गए थे तैनात

Published : Aug 06, 2023, 07:12 PM ISTUpdated : Aug 06, 2023, 11:45 PM IST
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सार

मणिपुर हिंसा के तीन महीने पूरे होने के बाद भी हिंसा और तनाव में कमी नहीं आई है। हिंसा के ताजा घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार ने जातीय हिंसा प्रभावित राज्य में सेंट्रल फोर्सेस को बढ़ा दिया है।

Manipur fresh violence: मणिपुर हिंसा के तीन महीने पूरे होने के बाद भी हिंसा और तनाव में कमी नहीं आई है। हिंसा के ताजा घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार ने जातीय हिंसा प्रभावित राज्य में सेंट्रल फोर्सेस को बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय ने 900 से अधिक और केंद्रीय बल के जवानों को राज्य में ड्यूटी लगा दी है। कुकी और मैतेई जनजातियों के बीच कई महीनों से हिंसा जारी है। इस हिंसा की चपेट में आने से डेढ़ सौ से अधिक जानें जा चुकी है। हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी की 10 और कंपनियां मणिपुर में भेजी हैं। यानी 900 से अधिक और जवान राज्य में तैनात किए जाएंगे। पैरा मिलिट्री फोर्स की 10 कंपनियां शनिवार रात राज्य की राजधानी इंफाल पहुंची। इन्हें पूर्वोत्तर राज्य के कई जिलों में तैनात किया जा रहा है।

3 मई को जातीय हिंसा भड़कने के बाद रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने सेना, अर्धसैनिक बल असम राइफल्स और विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के 40,000 से अधिक कर्मियों को तैनात किया।

अबतक लूटे गए 1195 हथियार बरामद

मणिपुर पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों ने अब तक राज्य भर से लूटे गए 1,195 हथियार और 14,322 विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद बरामद किए हैं। 3 मई को हिंसा शुरू होने के बाद से भीड़ और विद्रोहियों द्वारा पुलिस स्टेशनों और चौकियों से 4,000 से अधिक अत्याधुनिक हथियार और लाखों विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद लूट लिए गए हैं।

बिष्णुपुर में तीन लोगों की हत्या और कई घर जलाए गए

राज्य में हिंसा लगातार जारी है। शुक्रवार रात को विष्णुपुर में तीन लोगों की हत्या कर दी गई और घरों को जला दिया गया। हिंसा जिले के क्वाक्टा इलाके में हुई। मृतक कथित तौर पर मैतेई समुदाय से थे। दोनों समुदाय के लोगों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस दौरान कुकी समुदाय के कई घरों को भी जला दिया गया। एक दिन पहले भी मैतेई महिलाओं के बफर जोन में घुसने से रोकने पर असम राइफल्स से हुए झड़प में कई दर्जन लोग घायल हो गए थे। मणिपुर हिंसा में डेढ़ सौ से अधिक लोगों की जान तीन महीनों में जा चुकी है।

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