मणिपुर हिंसा पर ऑल पार्टी मीटिंग: CM बीरेन सिंह को हटाने की मांग, अमित शाह ने बताया-36000 सुरक्षाकर्मी और 40 से अधिक IPS लगाए गए

Published : Jun 26, 2023, 12:25 AM ISTUpdated : Jun 26, 2023, 12:39 AM IST
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सार

3 मई को मणिपुर में हिंसा शुरू हुई। तबसे लगातार राज्य में हिंसा जारी है। आमजन ही नहीं कई मंत्रियों तक के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री का घर भी इस हिंसा से अछूता नहीं रहा था।

Manipur Violence updates: मणिपुर हिंसा पर शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऑल पार्टी मीटिंग में केंद्र सरकार व राज्य द्वारा शांति बहाली के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया। विपक्षी दलों को उन्होंने सरकार की रणनीतियों को शेयर किया कि शांति स्थापित करने के लिए क्या क्या कदम उठाए जा रहे हैं ताकि नार्थ-ईस्ट में फिर से हिंसा न भड़के। विपक्षी दलों ने मीटिंग में मणिपुर के मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह को हटाने की मांग की।

3 मई को मणिपुर में हुई हिंसा के बाद पहली मीटिंग

3 मई को मणिपुर में हिंसा शुरू हुई। तबसे लगातार राज्य में हिंसा जारी है। आमजन ही नहीं कई मंत्रियों तक के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री का घर भी इस हिंसा से अछूता नहीं रहा था। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऑल पार्टी मीटिंग में 3 मई को राज्य में हिंसा की पहली घटना के बाद से किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। बताया कि राज्य में शांति बहाली के लिए क्या क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

36 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, 40 से अधिक आईपीएस अधिकारी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि हिंसा पर लगाम कसने के लिए और शांति बहाली खातिर राज्य में 36 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। चालीस से अधिक आईपीएस अधिकारी स्थितियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। सभी फील्ड में भेजे गए हैं।

विपक्षी दलों के आए हुए प्रतिनिधियों को बताया गया कि मणिपुर में हिंसा से 131 लोगों की जान गई है। 419 लोग इसमें घायल हुए हैं। आगजनी की राज्य में 5036 घटनाएं हुईं। हिंसा के मामले में 5889 एफआईआर हुए हैं और 144 अरेस्ट हुए हैं। शाह ने बताया कि मणिपुर में जातीय संघर्षों का इतिहास रहा है। राज्य में 1993 में 750 मौतें हुई थीं और 1997-98 में भी इसी तरह की झड़पें हुई थीं।

विपक्षी दलों ने जताई चिंता, एन.बीरेन सिंह को हटाने की मांग

सीपीएम, आप, राजद और कांग्रेस जैसी कई पार्टियों ने मांग की कि राज्य में जारी हिंसा को देखते हुए बीरेन सिंह को हटा दिया जाए क्योंकि वह शीर्ष पर बने रहने के लिए लोगों का विश्वास खो चुके हैं। टीएमसी समेत कई पार्टियों ने मांग की कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को राज्य का दौरा करने की अनुमति दी जाए जबकि सपा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास ने बीरेन सिंह को हटाने की मांग करने के साथ यह भी पूछा कि अब तक केवल 144 गिरफ्तारियां क्यों हुई हैं? इस पर गृह मंत्रालय की ओर से बताया गया कि मामला काफी संवेदनशील है। स्थितियां न बिगड़े इसका ध्यान रखते हुए अरेस्ट किया जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी, आप के संजय सिंह और डीएमके के तिरुचि शिवा ने भी मुख्यमंत्री पर हिंसा को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होने की ओर इशारा किया। मणिपुर के मुख्यमंत्री रहे ओकराम इबोबी सिंह ने कहा कि सभी विद्रोही समूहों को तुरंत डिसऑर्म्ड किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने यह भी मांग की कि इंफाल में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।

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