
नई दिल्ली: 1991 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के एक फ़ोन कॉल ने वित्त विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन सिंह को राजनीति में ला दिया। सिंह नीदरलैंड की यात्रा के बाद भारत लौटे थे और रात को सो रहे थे। तभी पी.वी. नरसिम्हा राव के निर्देश पर, उनके तत्कालीन प्रमुख सचिव पी.सी. अलेक्जेंडर ने डॉ. सिंह को फ़ोन किया और कहा, 'आप देश के वित्त मंत्री बनिए।' डॉ. सिंह ने संदेह जताया। तब अलेक्जेंडर ने कहा, 'एक मौका लीजिये। आप सफल हुए तो दोनों की जयजयकार होगी, असफल हुए तो मैं सज़ा भुगतूँगा।' यह किस्सा एक किताब में दर्ज है।
सिंह के यादगार और दुखद पल!: अमेरिका के साथ परमाणु समझौता प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह का अविस्मरणीय क्षण था, जबकि देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में अपेक्षित योगदान न दे पाना उनके जीवन का सबसे दुखद पहलू! अपनी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री के रूप में अपने जीवन के सबसे यादगार और दुखद पल के बारे में पूछे जाने पर डॉ. सिंह ने यह जवाब दिया था।
2005 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करना सबसे खुशी का पल था। इस समझौते ने देश में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाए और कई मायनों में देश के तकनीकी विकास में भी योगदान दिया। स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान: बच्चों, महिलाओं के स्वास्थ्य सहित समग्र स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रधानमंत्री के रूप में बहुत कुछ करना बाकी था। हमने जो राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन शुरू किया, उसकी उपलब्धियां सराहनीय हैं, लेकिन इस क्षेत्र में और भी बहुत कुछ किया जा सकता था।
कैबिनेट में मनमोहन के व्यक्तित्व की प्रशंसा: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर केंद्रीय कैबिनेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शोक व्यक्त किया गया और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में कहा गया है, 'पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय जीवन में अपनी छाप छोड़ी है। उनके निधन से देश ने एक कुशल प्रशासक और विशिष्ट नेता को खो दिया है।' इस अवसर पर, सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए 1 जनवरी तक राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इस दौरान कोई मनोरंजन कार्यक्रम नहीं होगा। साथ ही, सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की गई।
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