कोरोना और राम मंदिर अभियान के दौरान सेवा भारतीय समाज की सांस्कृतिक एकता को बताता है: मनमोहन वैद्य

Published : Mar 19, 2021, 03:43 PM IST
कोरोना और राम मंदिर अभियान के दौरान सेवा भारतीय समाज की सांस्कृतिक एकता को बताता है: मनमोहन वैद्य

सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दो दिवसीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार को बेंगलुरु के चेन्नहल्ली में शुरू हो गई। इस दौरान आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि कोरोना और राम मंदिर अभियान के दौरान हुई सेवा भारतीय समाज के लचीलेपन और सांस्कृतिक एकता को बताया है। 

बेंगलूरु. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दो दिवसीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार को बेंगलुरु के चेन्नहल्ली में शुरू हो गई। इस दौरान आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि कोरोना और राम मंदिर अभियान के दौरान हुई सेवा भारतीय समाज के लचीलेपन और सांस्कृतिक एकता को बताया है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह बैठक हर साल होती है। इसमें साल भर के कामों का अवलोकन होता है, साथ ही अगले साल की रणनीति बनाई जाती है। 

उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से मार्च से जून तक संघ का कार्य पूर्ण बंद था, शाखाएं बंद थीं। जुलाई से धीरे-धीरे शाखाएं लगना प्रारंभ हुई थीं। लेकिन संघ स्वयंसेवक एक्टिव रहे। इस आपदा में समाज की सहायता के लिए पहले दिन से ही देशभर में स्वयंसेवक सक्रिय थे। उन्होंने कहा, यह भारत की विशेषता है कि यहां सरकारी, प्रशासन की सेवाओं के साथ-साथ समाज भी सहयोगी था. बाढ़, भूकंप में सेवा करना अलग बात है, लेकिन कोरोना काल में संक्रमण के खतरे के बावजूद स्वयंसेवकों ने बड़ी मात्रा में सेवा कार्य किया। 
 
5.6 लाख कार्यकर्ताओं ने की सेवा
मनमोहन वैद्य ने बताया कि कोरोना काल में स्वयंसेवकों ने सेवा भारती के माध्यम से 92,656 स्थानों पर सेवा कार्य किए, इसमें 5,60,000 कार्यकर्ता सक्रिय रहे, 73 लाख राशन किट वितरित किए, 4.5 करोड़ लोगों को भोजन पैकेट वितरित किए गए, 90 लाख मास्क का वितरण किया, 20 लाख प्रवासी लोगों की सहायता की गई। 2.5 लाख घुमंतू लोगों की सहायता की, 60 हजार यूनिट रक्तदान भी किया। केवल संघ ही नहीं, समाज के अनेक संगठनों, मठ, मंदिर, गुरुद्वारों ने भी समाज की सेवा की। 
 
राम मंदिर सिर्फ मंदिर नहीं 
उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है, श्रीराम भारत की संस्कृति का परिचय है, चरित्र है। सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था - मंदिर हमारे सांस्कृतिक जागरण का केंद्र रहे हैं। आज यहां मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है, जिस दिन भारत के सांस्कृतिक मूल्य और भारत की समृद्धि उस ऊंचाई तक पहुंचेगी, तभी यह मंदिर निर्माण का कार्य पूर्ण होगा। 
 
मनमोहन वैद्य ने कहा कि निधि समर्पण अभियान में स्वयंसेवकों का उद्देश्य अधिक निधि एकत्र करना नहीं था। देशभर में अधिक से अधिक गांवों, परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य था। इससे पहले इतना व्यापक जनसंपर्क अभियान नहीं हुआ था। अभियान के तहत स्वयंसेवक 5,45,737 स्थानों पर पहुंचे और लगभग 20 लाख कार्यकर्ता संपर्क अभियान में जुड़े। अभियान के तहत देश में 12,47,21,000 परिवारों से स्वयंसेवकों ने संपर्क किया। अभियान में संपूर्ण देश में भावनात्मक एकात्मा का अनुभव हुआ है। 
 
संघ से जुड़ने वालों की संख्या बढ़ी 
उन्होंने कहा कि कोरोना काल और श्रीराम मंदिर के लिए जनसंपर्क अभियान में ध्यान में आया कि संघ को जानने की समाज में उत्सुकता बढ़ी है। इसलिए स्थान-स्थान पर संघ परिचय वर्ग की योजना बने, ऐसी हमारी योजना है। संघ से जुड़ने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। 

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