
नई दिल्ली. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के दौरान सबसे ज्यादा शिकार 20 से 29 साल के युवा बने हैं। जीटीबी अस्पताल के मुताबिक, दंगों में मारे गए 40 प्रतिशत लोगों की उम्र 20 से 29 साल थी। इसमें दो नाबालिग भी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दंगे से प्रभावित अधिकांश लोगों को जीटीबी अस्पताल लाया गया। यह अस्पताल दंगा प्रभावित इलाके से करीब है।
मृतकों में एक की उम्र 90 साल
आंकड़ों के मुताबिक, दंगे में मरने वालों में 18 की उम्र 20 से 29 साल के बीच है। 8 की उम्र 30 से 34 साल के बीच है। 3 की उम्र 35 से 39 साल और 5 की उम्र 40 से 49 साल के बीच है। दंगे में मारे गए लोगों में 4 शव 50 साल से अधिक उम्र के थे। एक की उम्र तो 90 साल थी। 2 अन्य 15 से 19 साल के बीच थे। 4 लोग ऐसे भी थे, जिनके शव से उम्र का पता नहीं लगाया जा सका।
ज्यादातर लोगों की अपनों का बचाव करते हुए मौत हुई
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दंगे में ज्यादातर लोगों की मौत अपनों को बचाने में हुई। या तो वे दंगे में अपने परिवार का बचाव कर रहे थे या पिर दंगे में फंसे हुए थे।
दिल्ली हिंसा में 53 लोगों की मौत हो चुकी है
घायलों की बात करें तो 298 में से 84 नौजवान हैं, जिनकी उम्र 20 से 29 साल है। बता दें कि दिल्ली हिंसा में 53 लोगों की मौत हो चुकी है। अब भी 10-12 लोगों अस्पताल में भर्ती हैं। इस मामले में अभी तक 683 केस दर्ज किए गए हैं। 1983 लोगों को गिरफ्तार या फिर हिरासत में लिया गया है। हिंसा की जांच के लिए दो एसआईटी का गठन किया गया है।
कब शुरू हुई थी दिल्ली हिंसा?
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में 23 फरवरी (रविवार) की शाम से हिंसा की शुरुआत हुई। इसके बाद 24 फरवरी पूरे दिन और 25 फरवरी की शाम तक आगजनी, पत्थरबाजी और हत्या की खबरें आती रहीं। हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक हेड कॉन्स्टेबल और एक आईबी का कर्मचारी भी शामिल है।
दिल्ली में कैसे शुरू हुई हिंसा?
सीएए के विरोध में शाहीन बाग में करीब 2 महीने से महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं। 23 फरवरी (रविवार) की सुबह कुछ महिलाएं जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन करने लगीं। दोपहर होते-होते मौजपुर में भी कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। शाम को भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में दूसरा शाहीन बाग नहीं बनने देंगे। कपिल मिश्रा भी अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतर आए, जिसके बाद मौजपुर चौराहे पर दोनों तरफ से ट्रैफिक जाम हो गया। इसी दौरान सीएए का समर्थन और विरोध करने वालों के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहीं से विवाद ऐसा बढ़ा कि तीन दिन तक जारी रहा।
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