
मुंबई। मणिपुर तीन मई से जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। इस बीच इसे धार्मिक संघर्ष का रंग देने की भी कोशिश की गई। मुंबई के आर्कबिशप ओसवाल्ड कार्डिनल ग्रेसियस ने इस तरह की बातों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा है कि मणिपुर हिंसा (Manipur violence) धार्मिक नहीं, जातीय संकट है। चर्च को भी शांति के लिए आगे आना चाहिए।
कार्डिनल ग्रेसियस ने अपने वीडियो मैसेज में कहा, "मणिपुर में जो कुछ हो रहा है उसे धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई है, लेकिन यह धार्मिक संघर्ष नहीं है। यह आदिवासी संघर्ष है। दो जनजाति जो ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के प्रति बहुत अधिक शत्रुतापूर्ण रहे हैं आमने-सामने हैं।"
ग्रेसियस ने कहा कि कुछ विधान के चलते हिंसा भड़क गई है। चर्चों को तोड़ा गया है, लेकिन मंदिरों को भी नष्ट किया गया है। हम ऐसा कुछ नहीं कर सकते, जिससे स्थिति और खराब हो। सद्भाव और शांति के लिए प्रयास जारी रखना चाहिए। चर्च को भी इसके लिए आगे आना चाहिए।
तीन मई से जातीय हिंसा की आग में जल रहा मणिपुर
बता दें कि मणिपुर तीन मई से जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। कुकी आदिवासी समूह और मैतेई समुदाय के लोगों के बीच संघर्ष हो रहा है। इसके चलते 160 से अधिक लोग मारे गए हैं। हजारों घरों को जलाया गया है। 40,000 से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। केंद्र सरकार ने राज्य में अर्धसैनिक बलों और सेना के जवानों को तैनात किया है। हिंसा को लेकर करीब 6,000 केस दर्ज हुए हैं।
चार मई को भीड़ द्वारा दो महिलाओं को नग्न कर घुमाया गया था। FIR के अनुसार इनमें से एक महिला के साथ गैंगरेप किया गया था। महिलाओं के नग्न परेड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया है।
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