
नई दिल्ली. वरिष्ठ वकील, सांसद और पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने दुख व्यक्त किया और कहा कि "मैं सौभाग्यशाली हूं कि उनके साथ बातचीत करने के कई मौके मिले, पीएम ने ट्वीट किया, ''श्री राम जेठमलानी जी के निधन से भारत ने एक असाधारण वकील और प्रतिष्ठित सार्वजनिक व्यक्ति को खो दिया, न्यायालय और संसद दोनों में उनका समृद्ध योगदान रहा। वह मजाकिया, साहसी और कभी भी किसी भी विषय पर मजबूती से अपनी बात कहने से नहीं कतराते थे। इन दुखद क्षणों में उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदना''
दूसरे ट्वीट में पीएम ने कहा, श्री राम जेठमलानी जी के सबसे अच्छे पहलुओं में से एक उनके मन की बात कहने की क्षमता थी और, उन्होंने बिना किसी डर के ऐसा किया। इमरजेंसी के काले दिनों के समय, उनकी स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्वतंत्रता के लिए लड़ाई में योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। जरूरतमंदों की मदद करना उनके व्यक्तित्व का एक अभिन्न हिस्सा था।
एक वकील ही नहीं जिंदादिल इंसान खोया-शाह
राम जेठमलानी के निधन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके घर जाकर अंतिम दर्शन किए। अमित शाह ने दुख जताते हुए ट्वीट किया, ''भारत के वयोवृद्ध वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री राम जेठमलानी जी के निधन के बारे में जान कर गहरी पीड़ा हुई। हमने ना केवल एक प्रतिष्ठित वकील को खो या बल्कि एक जिंदादिल महान इंसान को भी खोया है। राम जेठमलानी जी का निधन पूरे कानूनी समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति है। कानूनी मामलों पर उनके विशाल ज्ञान के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी संवेदना। शांति शांति शांति।''
वे हमेशा एक सर्वोच्च उदाहरण रहेंगे-रवि शंकर प्रसाद
केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी राम जेठमलानी के निधन पर शोक जताते हुए कहा, "उनकी कानून की समझ हमेशा एक न्यायिक व्यवसाय में हमेशा एक सर्वोच्च उदाहरण बनकर रहेगी।" रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, ''अनुभवी वकील और पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी के निधन पर गहरा हुआ" उनकी प्रतिभा, वाक्पटुता, शक्तिशाली वकालत और कानून समझ कानूनी पेशे में एक योग्य उदाहरण बनी रहेगी। मेरी गहरी संवेदना।''
कानूनी इतिहास में सुनहरे शब्दों में लिखा जाएगा जेठमलानी का नाम-केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी राम जेठमलानी के निधन पर दुख जताया। उन्होंने लिखा, ''मशहूर वकील राम जेठमलानी जी के निधन पर अत्यंत दुख हुआ। वे अपने आप में एक संस्था थे, स्वतंत्रता के बाद के भारत में उन्होंने आपराधिक कानून को आकार दिया। उनके जाने से पैदा हुआ शून्य कभी नहीं भरा जाएगा और उनका नाम कानूनी इतिहास में सुनहरे शब्दों में लिखा जाएगा।''
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