
धर्मशाला। आरएसएस (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि संघ के पास सरकार का रिमोट कंट्रोल नहीं है। मीडिया में आरएसएस को सरकार के रिमोट कंट्रोल के रूप में पेश किया जाता है। यह बिलकुल सच नहीं है। यह असत्य है। हमारे कुछ कार्यकर्ता सरकार का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन इससे यह कहना कि आरएसएस के पास सरकार का रिमोर्ट कंट्रोल है, गलत है। लोग हमसे पूछते हैं कि हमें सरकार से क्या मिलता है? उनके लिए मेरा जवाब है कि हमारे पास जो कुछ भी है उसे हमें खोना भी पड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला कॉलेज के सभागार में आयोजित पूर्व सैनिक प्रबोधन कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि 96 साल से हमेशा आरएसएस का विरोध हुआ, लेकिन हम समाज की सेवा में लगे रहे। स्वयंसेवक सत्ता में आए तो संघ को थोड़ी राहत मिली। सभी बाधाओं को पार करते हुए आरएसएस समाज की सेवा करते हुए आगे बढ़ता गया।
चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना मोहन भागवत ने कहा कि भारत की कभी किसी देश से दुश्मनी नहीं रही है, लेकिन दुनिया में दुश्मन होते हैं। कोई दुश्मनी करे तो झुकना नहीं, बल्कि दुश्मन को दबाकर आगे बढ़ना है। हिम्मत और ताकत में भारत का सैनिक दुनिया में अव्वल है। यह ताकत उनमें शारीरिक प्रशिक्षण से नहीं बल्कि मन से आती है।
संघ से चिपक गया हिंदुत्व शब्द
मोहन भागवत ने कहा कि कुछ शब्द हमारे जीवन से चिपक जाते हैं। हिंदोस्तान से हिंदू शब्द पड़ा। संघ से हिंदुत्व शब्द चिपक गया। हिंदुत्व किसी को जीतने की बात नहीं करता है। हिंदुत्व जोड़ने की बात करता है, किसी को बांटता नहीं है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इलाज की प्राचीन भारतीय पद्धति का आज इस्तेमाल बढ़ा है। हमें हमारे पारंपरिक भारतीय उपचार जैसे कि काढ़ा, क्वाथ जैसी चीजों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा। कोरोना काल में इनकी उपयोगिता पूरी दुनिया ने देखी है। अब दुनिया भारतीय मॉडल का अनुकरण करना चाहती है। हमारा देश भले ही विश्व शक्ति न बने, लेकिन विश्व गुरु जरूर हो सकता है।
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