
नई दिल्ली. भारत कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है। ऐसे में कोरोना वॉरियर्स पूरी जी जान से लोगों की सेवा में जुटे हैं। हालांकि, ऐसे में उन्हें भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही हैं। अपने जीवन को दांव पर लगाने वाले ऐसे ही वॉरियर्स की कुछ समस्याओं को कम करने के लिए मुंबई के 19 साल के छात्र ने वेंटिलेशन सिस्टम वाली पीपीई किट बनाई है।
दरअसल, मरीजों के इलाज के दौरान डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मियों को 12-12 घंटे पीपीई किट पहननी पड़ रही है। इसके चलते वे इतनी गर्मियों में इतनी देर तक पसीने में डूबे रहते हैं। लेकिन अब इस किट के आने के बाद कोरोना वॉरियर्स को राहत मिलेगी।
19 साल के छात्र ने बनाई किट
केजे सोमइया कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहे मुंबई के निहाल सिंह आदर्श ने पीपीई किट के लिए बेल्ट की तरह पहनने वाले वेंटिलेशन सिस्टम को बनाया है। इसका नाम Cov-Tech वेंटिलेशन सिस्टम रखा गया है। इसमें एक बैटरी भी लगी है। यह 6-8 घंटे चलती है।
इस डिवाइस को पहनने पर आपको पंखे के सामने बैठने जैसा एहसास होगा, भले ही आपने पीपीई किट क्यों ना पहनी हो। यह चारों तरफ से हवा को खींचता है और उसे फिल्टर कर पीपीई किट में भेजता है। आम तौर पर वेंटिलेशन की कमी के चलते पीपीई किट काफी गर्म हो जाती है।
निहाल सिंह की मां भी हैं डॉक्टर
वेंटिलेशन सिस्टम का डिजाइन पीपीई किट से पूरी तरह से एयर सील रहता है। यह सिर्फ 100 सेकंड में ताजी हवा प्रदान करता है निहाल सिंह ने बताया कि उनकी डॉक्टर मां की जरूरत ही उनके आविष्कार के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।
निहाल की मां, डॉ पूनम कौर एक डॉक्टर हैं, जो पुणे में अपने क्लिनिक में COVID-19 मरीजों का इलाज कर रही हैं। हर दिन घर लौटने के बाद, वे निहाल को डॉक्टरों और नर्सों को होने वाली समस्याओं को बताती हैं, जो पीपीई किट पहनने के बाद होती हैं।
निहाल ने 20 दिन में बनाया मॉडल
निहाल ने अपनी मां की समस्याओं को देखते हुए इस पर काम शुरू किया और 20 दिनों में इसका मॉडल तैयार किया। उन्हें भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास बोर्ड के सोमैया विद्याविहार यूनिवर्सिटी के रिसर्च इनोवेशन इनक्यूबेशन डिजाइन लेबोरेटरी से समर्थन मिला।
पहले गले में पहनने वाला सिस्टम बनाया
निहाल ने पहले गले में पहनने वाला सिस्टम तैयार किया। इसे डॉक्टरों को इस्तेमाल के लिए दिया गया। लेकिन इसे पहनकर काम करना आसान नहीं था। इसलिए इसे रिजेक्ट कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने दूसरी डिजाइन पर काम करना शुरू किया। उन्होंने फाइनल प्रोडक्ट से पहले 20 प्रोटोटाइप मॉडल बनाए। बाद में बेल्ट की तरह इस्तेमाल किया जाने वाला यह सिस्टम बनाया गया।
निहाल को भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की ओर से प्रोटोटाइप और प्रोडक्ट के उत्पादन के लिए 10 लाख रुपए की ग्रांट भी मिली। अब यह प्रोडक्ट मात्र 5499 रु की कीमत में उपलब्ध है। इसकी सिस्टम की 30-40 यूनिटों को देश के डॉक्टर्स और एनजीओ को ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल के लिए दिया गया है।
National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.