ऐसे रची गई थी राजीव गांधी की हत्या की साजिश, ये 4 थे मास्टरमाइंड जिन्होंने दिया घटना को अंजाम

Published : Jul 25, 2019, 12:55 PM ISTUpdated : Jul 25, 2019, 03:52 PM IST
ऐसे रची गई थी राजीव गांधी की हत्या की साजिश, ये 4 थे मास्टरमाइंड जिन्होंने दिया घटना को अंजाम

सार

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेंरबदूर में हुए एक धमाके में राजीव गांधी की मौत हो गई थी। राजीव गांधी की हत्या की साजिश भारत नहीं बल्कि बाहर रची गई थी।

चेन्नई। राजीव गांधी की हत्या में पिछले 27 साल से उम्रकैद की सजा काट रही एस नलिनी गुरुवार को एक महीने की पैरोल पर वैल्लोर सेंट्रल जेल से बाहर आई। नलिनी ने बेटी की शादी की तैयारी के लिए छह महीने की पैरोल की मांग की थी। बता दें कि 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेंरबदूर में हुए एक धमाके में राजीव गांधी की मौत हो गई थी। राजीव गांधी की हत्या की साजिश भारत नहीं बल्कि बाहर रची गई थी। जानते हैं राजीव गांधी की हत्या की साजिश को कब, कैसे, कहां और किसने अंजाम दिया था। 

पड़ोसी देश श्रीलंका में रची गई थी साजिश...
नवंबर, 1990 में जाफना (श्रीलंका) में लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन और उसके चार साथियों बेबी सुब्रह्मण्यम, मुथुराजा, मुरूगन और शिवरासन ने यह साजिश रची थी। जंगल में घंटों चली गोपनीय बैठक के बाद आखिर प्रभाकरन ने राजीव गांधी की मौत के प्लान पर मुहर लगा दी। प्लान को पूरा करने की जिम्मेदारी चार लोगों को सौंपी गई थी। 
बेबी सुब्रमण्यम : लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) विचारक, हमलावरों के लिए रहने की जुगाड़।
मुथुराजा : प्रभाकरन का खास आदमी, हमलावरों के लिए कम्युनिकेशन और पैसों का इंतजाम।
मुरुगन : विस्फोट करने में माहिर, हमले के लिए जरूरी चीजों का इंतजाम। 
शिवरासन : लिट्टे के लिए जासूसी।

- प्रभाकरन से राजीव गांधी की हत्या का फरमान मिलने के बाद बेबी सुब्रह्मण्यम और मुथुराजा 1991 की शुरुआत में चेन्नई आए। बेबी और मुथुराज को चेन्नई में ऐसे लोग ढूंढने थे, जो राजीव के हत्यारों के लिए हत्या से पहले रुकने के लिए घर दें और हत्या के बाद छिपने की जगह।  
- बेबी सुब्रह्मण्यम और मुथुराजा चेन्नई में सबसे पहले शुभा न्यूज फोटो एजेंसी पहुंचे। एजेंसी का मालिक शुभा सुब्रह्मण्यम ईलम सपोर्टर था। शुभा को साजिश के लिए लोकल सपोर्ट देना था। बेबी सुब्रह्मण्यम ने सबसे पहले शुभा न्यूज फोटो एजेंसी में काम करने वाले भाग्यनाथन को अपनी ओर किया। राजीव हत्याकांड में सजा भुगत रही नलिनी इसी भाग्यनाथन की बहन है, जो उस वक्त एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करती थी। नलिनी की मां नर्स थी और उन्हें अस्पताल की ओर से मिला घर खाली करना था। मुश्किल हालात में घिरे भाग्यनाथन और नलिनी को आतंकी बेबी ने पैसे और मदद के झांसे में ले लिया। 

रविशंकरन और हरिबाबू को भी लाए साथ...
शुभा न्यूज एजेंसी में रविशंकरन और हरिबाबू बतौर फोटोग्राफर काम करते थे। हरिबाबू को नौकरी से निकाल दिया गया था। ऐसे में मुथुराजा ने हरिबाबू को दूसरी जगह नौकरी दिलाने में मदद की। यहां हरिबाबू को अच्छा पैसा मिलने लगा और वह मुथुराजा का मुरीद हो गया। मुथुराजा ने हरिबाबू को राजीव गांधी के खिलाफ भड़काने का काम शुरू कर दिया और कहा कि अगर वो 1991 के चुनाव में जीत गए तमिलों की हालत बेहद खराब होगी।

हत्यारों की नकली पहचान के लिए फर्जीँ ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए...
इसके बाद मुरुगन के इशारे पर दो और लोग जयकुमारन और पायस साजिश में शामिल हो गए और ये  नलिनि-भाग्यनाथन-बेबी-मुथुराजा के ठिकाने पर पहुंचे। नलिनि जिस प्रिटिंग प्रेस में नौकरी करती थी, वहां छप रही किताब सैटनिक फोर्सेस ने उसका ब्रेनवॉश कर दिया। नलिनी पूरी तरह राजीव गांधी के खिलाफ हो गई थी। अब मुरुगन ने हत्यारों की नकली पहचान तैयार करने के लिए जयकुमारन और पायस की मदद से फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए। 

मानवबम के लिए प्रभाकरन ने भेजीं दो महिलाएं...
अब साजिश के चौथे सूत्रधार शिवरासन को संदेशा भेजा गया और मार्च, 1990 की शुरुआत में वो समुद्र के रास्ते चेन्नई पहुंचा। यहां वो पोरूर इलाके में पायस के घर रुका। पोरूर राजीव की हत्या की साजिश का मुख्य अड्डा था। अब शिवरासन ने कमान अपने हाथ में ले ली और चेन्नई में नलिनी, मुरूगन और भाग्यनाथन के साथ मानवबम की तलाश की। जब मानवबम नहीं मिला तो वह वापस जाफना गया और प्रभाकरन को बात बताई। इस पर प्रभाकरन ने शिवरासन की चचेरी बहनों धनू और शुभा को उसके साथ भारत भेजा। 

कमर में बांधने के लिए बनाया बम...
धनू और शुभा को शिवरासन नलिनी के घर ले गया। इसके बाद उसने बम एक्सपर्ट अरिवू से एक ऐसा बम बनाने को कहा, जो महिला की कमर में बांधा जा सके। अरिवू ने एक ऐसी बेल्ट बनाई, जिसमें छह आरडीएक्स भरे ग्रेनेड जमाए जा सकें। हर ग्रेनेड में अस्सी ग्राम C4 आरडीएक्स भरा गया। बम को ऐसे डिजाइन किया गया था कि आरडीएक्स भले चाहे कम हो लेकिन जब धमाका हो तो टारगेट बच न सके। 

साजिश को अंजाम देने से पहले की रेकी...
अब शिवरासन के पास बम भी था और इसे अंजाम देने वाली मानवबम धनू भी। इतंजार था तो बस राजीव गांधी की रैली का। 12 मई 1991 को शिवरासन और धनू ने पूर्व पीएम वीपी सिंह और डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि की रैली में फाइनल रेकी की। अरक्कोनम में हुई इस रैली में धनू वीपी सिंह के बेहद करीब पहुंची और उनके पैर भी छुए। बस बम का बटन नहीं दबाया। अब शिवरासन के इरादे बुलंद हो गए और उसे प्लान कामयाब होता नजर आया। 

20 मई की रात हमलावरों ने की प्रैक्टिस...
राजीव गांधी की चुनावी मीटिंग 21 मई को श्रीपेरंबदूर में तय थी। शिवरासन ने तय कर लिया कि 21 को ही साजिश को अंजाम देना होगा। नलिनी के घर 20 मई की रात शुभा ने धनू को बेल्ट पहनाकर प्रैक्टिस करवाई। सुबह पांच लोग शिवरासन, धनू, शुभा, नलिनी और हरिबाबू साजिश को अंजमा देने के लिए तैयार थे।

माला पहनाई, पैर छुआ और सबकुछ खत्म...
श्रीपेरंबदूर की रैली में राजीव गांधी के पहुंचने के बाद एक महिला सब इंस्पेक्टर ने धनू को दूर रहने को कहा पर राजीव गांधी उसे रोकते हुए बोले कि सबको पास आने का मौका मिलना चाहिए। राजीव को नहीं पता था कि वो जनता को नहीं मौत को पास बुला रहे हैं। इसके बाद उस महिला ने उन्हें जैसे ही माला पहनाई और पैर छूने के लिए झुकी तो तेज धमाका हुआ और सबकुछ खत्म हो गया।  

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

बाइक पर पत्नी ने 27 सेकेंड में पति को जड़े 14 थप्पड़, देखें Viral Video
Viral Road Rage Video: HR नंबर प्लेट Thar के कारनामें ने इंटरनेट पर मचाई खलबली