किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच मोदी सरकार ने अन्नदाताओं को दिए बड़े तोहफे, बढ़ेंगी गन्ना किसानों की आमदनी

Published : Feb 21, 2024, 11:12 PM ISTUpdated : Feb 21, 2024, 11:25 PM IST
Union Minister Anurag Thakur

सार

केंद्र सरकार ने गन्ना के लिए न्यूनतम कीमत 340 रुपए प्रति क्विंटल तय की है। इससे 5 करोड़ से अधिक गन्ना किसानों को होगा फायदा। इसके साथ ही राष्ट्रीय पशुधन मिशन में अतिरिक्त गतिविधियों को शामिल किया गया है। 

नई दिल्ली। MSP समेत कई मांगों को लेकर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने किसानों को बड़े तोहफे दिए हैं। केंद्र सरकार ने ऐसे फैसले किए हैं, जिससे गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने पशुपालकों के हित में भी निर्णय लिया है।

कैबिनेट के फैसले के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार पिछले 10 वर्षों से किसानों के कल्याण के लिए काम कर रही है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने बुधवार को चीनी सीजन 2024-25 के लिए 10.25% की चीनी रिकवरी दर पर गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) 340 रुपए प्रति क्विंटल को मंजूरी दी। चालू सीजन 2023-24 के लिए गन्ने की FRP से 2024-25 के लिए घोषित FRP लगभग 8% अधिक है। यह 1 अक्टूबर से लागू होगी और 30 सितंबर 2025 तक जारी रहेगी। 

नया FRP गन्ने की A2+FL लागत से 107% अधिक है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। बता दें कि भारत में गन्ने की कीमत दुनिया में सबसे अधिक है। दूसरी ओर सरकार भारत के लोगों को सबसे सस्ती चीनी मिले इसकी व्यवस्था कर रही है।

5 करोड़ से अधिक गन्ना किसानों को होगा फायदा

FRP बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले से 5 करोड़ से अधिक गन्ना किसानों और चीनी क्षेत्र से जुड़े लाखों अन्य लोगों को फायदा होने वाला है। चीनी मिलें गन्ने की एफआरपी 10.25% की रिकवरी पर 340 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करेंगी। इससे किसानों को 3.32 रुपए की अतिरिक्त कीमत मिलेगी। वर्तमान में गन्ने का न्यूनतम मूल्य 315.10 रुपए प्रति क्विंटल है। इसे बढ़ाकर 340 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन में अतिरिक्त गतिविधियों को शामिल करने को मिली मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन में अतिरिक्त गतिविधियों को शामिल करने को मंजूरी दी है। घोड़ा, गधा, खच्चर, ऊंट के लिए उद्योग लगाने पर सरकार 50 लाख तक की 50% पूंजी सब्सिडी देगी। घोड़े, गधे और ऊंट के नस्ल बचाने के लिए राज्य सरकार को सहायता दी जाएगी। चारा खेती के क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को गैर वन भूमि, बंजर भूमि, गैर कृषि योग्य भूमि के साथ-साथ वन भूमि में चारे की खेती के लिए सहायता मिलेगी।

पशुधन बीमा कार्यक्रम को सरल बनाया गया है। किसानों के लिए प्रीमियम का लाभार्थी हिस्सा कम किया गया है। यह मौजूदा लाभार्थी हिस्से 20%, 30%, 40% और 50% के मुकाबले 15% होगा। प्रीमियम की शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। बीमा किए जाने वाले पशुओं की संख्या भेड़ और बकरी के लिए 5 मवेशी के बजाय 10 मवेशी तक बढ़ाई गई है।

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