
नई दिल्ली। 18वीं लोकसभा का चुनाव परिणाम सामने आने के बाद एनडीए सरकार अस्तित्व में आ गई है। किसी भी दल को अकेले जनादेश नहीं मिलने पर बीजेपी ने एनडीए के अपने दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई है। 9 जून को नरेंद्र मोदी ने पीएम पद की शपथ ली। मोदी ने पीएम पद की तीसरी बार शपथ ली तो यह दावा किया गया कि वह नेहरू के बाद तीसरी बार शपथ लेने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बन गए हैं। लेकिन असलियत में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में पांच बार शपथ ली है।
नेहरू पांच बार पीएम पद की लिए शपथ जबकि मोदी केवल 3 बार
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, आजाद भारत में चार बार पीएम पद की शपथ लिए हैं। इतिहास को देखे तो यह साफ हो जाएगा कि नरेंद्र मोदी केवल तीन बार और पंडित नेहरू आजाद भारत में चार बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए हैं। यानी मोदी से एक बार अधिक। और अगर आजादी के पूर्व बनी आंतरिक सरकार को जोड़े तो यह संख्या पांच हो जाएगी। यानी पंडित नेहरू भारत के पांच बार पीएम रहे। देश की आजादी मिलने के बाद 1947 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इसके बाद उन्होंने 1952, 1957 और 1962 में शपथ ली। यानी
1962 का चुनाव स्वतंत्र भारत में होने वाला तीसरा चुनाव था। लेकिन नेहरू, 1947 से ही प्रधानमंत्री थे। अगर 1946 की अंतरिम सरकार को गिने तो पंडित नेहरू भारत के पांच बार पीएम रहे हैं। अंतरिम सरकार, देश को ब्रिटेश उपनिवेश से स्वतंत्र गणराज्य में बदलने के लिए बनाई गई थी।
पीएम मोदी की बात करें तो उन्होंने केवल तीन बार ही पीएम पद की शपथ ली है। साल 2014 में वह पहली बार देश के पीएम बने थे। 2019 में वह दूसरी बार और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है।
बीजेपी का प्रदर्शन खराब...
पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में बीजेपी का ग्राफ एवं प्रदर्शन खराब होता गया। 2014 में बीजेपी ने अकेले 282 सीटें जीती थीं। 2019 में यह संख्या 303 हो गई। 2019 में पूरे देश में देशभक्ति की ज्वार थी। पुलवामा कांड के बाद भारतीय सेना का बालाकोट स्ट्राइक ने देशभक्ति को चरम पहुंचा दिया था जोकि बीजेपी वोट के रूप में कैश कराने में सफल रही। लेकिन 2024 में यह ग्राफ 240 पर आकर अटक गया। अकेले अपने बल पर सरकार बनाने वाला बहुमत तक नहीं मिला।
अटल बिहारी वाजपेयी ने भी तीन बार शपथ ली तो इंदिरा ने 4 बार
भारतीय चुनावों के इतिहास को देखें तो अटल बिहारी वाजपेयी भी तीन बार देश के पीएम रहे हैं। हालांकि, उनका दो कार्यकाल काफी अल्प समय का रहा। अटल जी 1996,1998 और 1999 में देश के प्रधानमंत्री रहे। इंदिरा गांधी ने चार बार - 1966, 1967, 1971 और 1980 में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
अब नेहरू के तीन कार्यकाल को देखें...
1952 में हुए पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने 364 सीटें जीती थीं। 1957 में दूसरे आम चुनाव में इसकी सीटों की संख्या 371 हो गई लेकिन 1962 में घटकर 361 रह गई। पंडित नेहरू के कार्यकाल के दौरान लोकसभा सीटों की संख्या 494 थी। अभी संसद सदस्यों की संख्या 542 है। पहले दो आम चुनाव में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के भी चुनाव एक साथ हुए थे। पहले तीन चुनाव में कांग्रेस ने सभी राज्यों में एकतरफा बहुमत हासिल किया था। केवल 1957 में केरल में सीपीआई ने बहुमत प्राप्त किया था। यहां पहला गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी।
पहले दो चुनाव की तरह 1962 में विपक्ष का प्रदर्शन काफी खराब
पहले दो चुनावों की तरफ 1962 का आम चुनाव भी विपक्ष के खराब प्रदर्शन के नाम रहा। सीपीआई 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी थी। जबकि सी.राजगोपालाचारी की स्वतंत्र पार्टी पहली बार चुनाव लड़कर 18 सीटें हासिल की थी। जनसंघ को 14 सीटें हासिल हुई थी। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और सोशलिस्ट पार्टी - ने भी संयुक्त रूप से 18 सीटें जीतीं।
आलोचनाओं और विपक्ष का सम्मान करते थे नेहरू
नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस के भारी बहुमत के बावजूद वह विपक्ष का बहुत सम्मान करते थे और उनकी आलोचनाओं के प्रति संवेदनशील थे। विपक्षी दल कम संख्या में होने के बाद भी सरकार की नीतियों को प्रभावित करने में सक्षम थे क्योंकि नेहरू ने स्वतंत्र बहस को प्रोत्साहित किया और हमेशा राष्ट्रीय हित को अपनी पार्टी से ऊपर रखा। वे नियमित रूप से प्रश्नकाल में बैठते थे और संसदीय प्रक्रियाओं और कानून के प्रति सर्वोच्च शिष्टाचार, गरिमा और सम्मान का उदाहरण पेश करते थे। नेहरू ने जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव रखी और 17 वर्षों तक जिसे पोषित किया, उसे दुनिया आज भी जानती और स्वीकारती है।
1962 में नेहरू का मंत्रिमंडल
पंडित जवाहर लाल नेहरू का मंत्रिमंडल छोटे आकार का होता था लेकिन उत्कृष्ट व्यक्तित्व उसमें शामिल होते थे। 1962 में उनके मंत्रिमंडल में 17 कैबिनेट और 5 राज्य मंत्री थे।
नेहरू की कैबिनेट
1. जवाहरलाल नेहरू, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और परमाणु ऊर्जा मंत्री
2. मोरारजी देसाई, वित्त मंत्री
3. जगजीवन राम, परिवहन और संचार मंत्री
4. गुलजारीलाल नंदा, योजना और श्रम और रोजगार मंत्री
5. लाल बहादुर शास्त्री, गृह मंत्री
6. सरदार स्वर्ण सिंह, रेल मंत्री
7. के.सी. रेड्डी, वाणिज्य और उद्योग मंत्री
8. वी.के. कृष्ण मेनन, रक्षा मंत्री
9. अशोक कुमार सेन, कानून मंत्री
10. के.डी. मालवीय, खान एवं ईंधन मंत्री
11. एस.के. पाटिल, खाद्य एवं कृषि मंत्री
12. हुमायूं कबीर, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री
13. बी. गोपाल रेड्डी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री
14. सी. सुब्रमण्यम, इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री
15. हाफिज मोहम्मद इब्राहिम, सिंचाई एवं बिजली मंत्री
16. डॉ. के.एल. शिरीमाली, शिक्षा मंत्री
17. सत्य नारायण सिन्हा, संसदीय मामलों के मंत्री।
(नोट: इस लेख को प्रवीन डावर ने लिखा है। वह लेखक और स्तंभकार हैं।)
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