प्राचीन स्मारकों को देखने चार दिन की यात्रा पर अरुणाचल प्रदेश जाएंगे NMA के अध्यक्ष तरुण विजय

Published : Jun 11, 2022, 07:26 PM IST
प्राचीन स्मारकों को देखने चार दिन की यात्रा पर अरुणाचल प्रदेश जाएंगे NMA के अध्यक्ष तरुण विजय

सार

एनएमए के अध्यक्ष तरुण विजय चार दिन की यात्रा पर अरुणाचल प्रदेश जाएंगे। वह बुजुर्गों और विभिन्न जनजातियों के नेताओं से मिलेंगे और वहां के सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी जुटाएंगे।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) के अध्यक्ष तरुण विजय 14 से 18 जून 2022 के बीच तिब्बत-चीन क्षेत्र की सीमा से लगे प्राचीन स्मारकों को देखने के लिए अरुणाचल प्रदेश का दौरा करेंगे। वह स्थानीय जनजातीय नेताओं से मुलाकात करेंगे और आस्था के उन स्थानों का पता लगाएंगे जो किंवदंतियों और मौखिक इतिहास के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ते हैं।

अरुणाचल की यात्रा के दौरान तरुण विजय बुजुर्गों और विभिन्न जनजातियों के नेताओं से मिलेंगे। उनसे मिली जानकारियों के आधार पर तरुण विजय रिपोर्ट बनाएंगे और उसे संस्कृति मंत्री और प्रधानमंत्री को सौंपेंगे। वे केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारकों की सूची में नए स्मारकों को जोड़ने का सुझाव देंगे और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों की पहचान करेंगे।

अरुणाचल में परशुराम कुंड, भीष्मकनगर, भालुकपोंग और तवांग जैसे पुरातात्विक महत्व के कुछ स्थल हैं। ये स्थल अरुणाचल को गुजरात, गोवा और केरल से जोड़ते हैं। तरुण विजय ने कहा कि उनके साथ एनएमए टीम भी अरुणाचल जाएगी। इनमें दो सदस्य हेमराज कामदार (गुजरात) और प्रोफेसर कैलाश राव (विशाखापत्तनम) भी शामिल हैं।

अरुणाचल प्रदेश के पुरातात्विक स्थलों पर नहीं दिया गया ध्यान
बता दें कि अरुणाचल प्रदेश को विरासत संरक्षण के क्षेत्र में अकेला छोड़ दिया गया है। यहां के स्मारकों को राष्ट्रीय पुरातात्विक स्थलों की केंद्रीय संरक्षित सूची में शामिल करने में कमी हुई है। NEFA से अरुणाचल के राज्य बनने तक की यात्रा के सात दशक पूरे हो गए। इसके बाद भी वहां के स्मारकों पर ध्यान नहीं दिया गया। ये मूर्त और अमूर्त विरासत उन्हें गुजरात और भारत के अन्य हिस्सों के पश्चिमी तट से जोड़ती हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसपर किसी का ध्यान नहीं गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल से गुजरात के पोरबंदर तक वार्षिक यात्रा की शुरुआत की। इससे रुक्मणी की विरासत के इर्दगिर्द बुने गए सांस्कृतिक धागों को मजबूत किया।

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