
NEET-UG exam Paper leak: नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोबारा परीक्षा कराने की मांग हमारा लास्ट ऑप्शन होगा। पहले जांच पैनल पेपर लीक मामले की जांच करे। बेंच की अध्यक्षता करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि बिना यह समझे कि कितने छात्रों ने नकल की है, दोबारा परीक्षा का आदेश देने से उन लाखों छात्रों पर असर पड़ेगा जिन्होंने नकल नहीं की। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर छात्रों से परीक्षा की सुबह लीक पेपर नहीं दिया गया, क्यों कि सुबह पेपर देकर जवाब याद करने को कहा गया हो तो लीक इतना व्यापक नहीं होगा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए बुधवार 10 जुलाई डेट मुकर्रर की। सीजेआई ने कहा कि बुधवार को सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से पेश सभी वकील इस बात पर अपनी दलीलें पेश करेंगे कि दोबारा परीक्षा क्यों होनी चाहिए। सीबीआई भी मामले में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी। केंद्र सरकार से कोर्ट ने लीक हुए पेपर के सेंटर्स की लिस्ट मांगी है साथ ही पेपर लीक से किन स्टूडेंट्स को फायदा पहुंचा है इसकी भी जानकारी देने को कहा है।
तमाम स्टूडेंट ऐसे हैं जो दोबारा परीक्षा देने में सक्षम नहीं
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि नीट परीक्षा देने वाले लगभग 24 लाख छात्रों में से कई गरीब परिवारों से आते हैं। यह स्टूडेंट परीक्षा केंद्रों तक जाने के लिए पैसे खर्च करने में असमर्थ हैं। इनको ध्यान में रखकर दोबारा परीक्षा का आदेश देना तबतक उचित नहीं है जबतक यह आवश्कय न हो। दोबारा परीक्षा कराना "अंतिम विकल्प" है। कोर्ट ने कहा कि एक बात तो साफ है, पेपर लीक हुए थे। परीक्षा की पवित्रता से समझौता किया गया है, इसमें कोई संदेह नहीं है। अब हमें यह पता लगाना है कि लीक की सीमा क्या है। हमें दोबारा परीक्षा का आदेश देते समय सावधान रहना होगा। हम लाखों छात्रों के करियर से निपट रहे हैं।
मल्टी स्पेशलिस्ट पैनल का होगा गठन
कोर्ट ने तत्काल दोबारा परीक्षा का आदेश देने के बजाय इस मामले की जांच के लिए एक मल्टी स्पेशलिस्ट पैनल के गठन की सलाह दी जिसकी जांच पहले से ही सीबीआई और पुलिस द्वारा की जा रही है।
सरकार को भी फटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक से लगातार इनकार करने पर सरकार को भी फटकारा। कोर्ट ने कहा कि उसे लीक हुई परीक्षा के लिए पेमेंट करने वाले कैंडिडेट्स और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने वालों से निपटने में कठोर होना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि नीट परीक्षा शुरू होने के कम से कम 24 घंटे पहले टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप पर पेपर करीब 24 घंटे पहले ही पहुंच चुका था।
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