
मुंबई. महाराष्ट्र में एंटीलिया केस, मनसुख हिरेन की मौत, गृह मंत्री अनिल देशमुख पर पूर्व पुलिस कमिश्नर के आरोप और सचिन वझे के मामले में उद्धव सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच भाजपा ने उद्धव सरकार गिराने की प्लानिंग शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि भाजपा की कोशिश है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाए।
भाजपा कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर महाविकास अघाड़ी सरकार को घेरने की कोशिश की है। इसलिए भाजपा कानून-व्यवस्था के खराब होने से जुड़े तमाम मुद्दों को लगातार उठा रही है।
अजित पवार ने मिली भाजपा को निराशा
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि पार्टी को एक बार अजित पवार से निराशा हाथ लगी है। दरअसल, अजित पवार को फिर से साथ लाने का भाजपा का प्लान विफल होता नजर आ रहा है। भाजपा का मानना था कि अजित पवार इस मुद्दे पर NCP विधायकों तोड़ कर भाजपा के साथ आ जाएंगे और उद्धव सरकार गिर जाएगी। वहीं, शरद पवार की सख्ती एक बार फिर भाजपा के प्लान पर ग्रहण लगा रही है। ऐसे में भाजपा ने प्लान 'B'पर काम करना शुरू किया है।
अब क्या है भाजपा का नया प्लान?
BJP सूत्रों के मुताबिक, सचिन वझे मामले में एनसीपी की भी छवि खराब हुई है। ऐसे में भाजपा रणनीतिकार NCP के साथ सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं। इसलिए अब भाजपा ने राष्ट्रपति शासन लगवाने और फिर मध्यावधि चुनाव का रास्ता चुना है।
बदल सकता है भाजपा का अध्यक्ष
भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने का भी मन बना लिया है। बताया जा रहा है कि भाजपा चंद्रकांत पाटिल की जगह पूर्व वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार को कमान देने के पक्ष में है। हालांकि, इस चुनाव में भी देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री पद के चेहरे होंगे। वहीं, मुनगंटीवार अगर भाजपा को जिताने में कामयाब होती है, तो उन्हें केंद्र में भेजने की तैयारी है।
महाराष्ट्र में भाजपा ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं, लेकिन सरकार शिवसेना ने बनाई
महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिवसेना ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। भाजपा ने इस चुनाव में 105, शिवसेना ने 56 सीटें जीती थीं। वहीं, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। लेकिन शिवसेना ने चुनाव नतीजों के बाद सीएम पद को लेकर भाजपा पर दबाव बनाना शुरू किया। लेकिन भाजपा ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसी बीच भाजपा ने अजित पवार के साथ सरकार बनाई। लेकिन वे अपने साथ एनसीपी के विधायक नहीं तोड़ पाए। बहुमत साबित करने से पहले ही अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया और सरकार गिर गई। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई।
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