
नई दिल्ली. निर्भया से चलती बस में गैंगरेप के चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी देने का आदेश है। इस बीच दोषियों के अंगदान करने की अपील को लेकर एक संस्था पटियाला हाउस कोर्ट पहुंची। रोड एंटी करप्शन ऑर्गनाइजेशन नाम की संस्था की अपील पर कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।
दोषियों से मिलने की इजाजत मांगी
संस्था ने अपनी अर्जी में चारों दोषियों से मिलने की इजाजत मांगी है, जिससे उन चारों से बात कर अंगदान के लिए राजी कर सकें। अर्जी में कहा गया है कि दोषियों से मिलने के लिए एक पैनल तैयार किए जाए, जिसमें वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर और मनोचिकित्सक शामिल हों।
"अंगदान से शांति से मर सकेंगे दोषी"
संस्था का कहना है कि अंगदान से चारों दोषी शांति से मर सकेंगे। उन्हें इस बात की संतुष्टी रहेगी कि वह समाज के लिए कुछ अच्छा काम करके जाएंगे।
"अंगदान से कम होगी सामाजिक उपेक्षा"
अर्जी में तर्क दिया गया है कि अगर अंगदान के प्रोत्साहन से चारों दोषी तैयार हो जाते हैं तो यह दोषियों के परिवार के लिए सामाजिक तौर पर राहत देने वाला कदम होगा।
निर्भया के साथ क्या हुआ था?
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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