क्या निर्भया के दोषियों को 20 मार्च को फांसी होगी? अक्षय की वजह से फंस सकता है पेंच

Published : Mar 06, 2020, 01:07 PM ISTUpdated : Mar 06, 2020, 02:00 PM IST
क्या निर्भया के दोषियों को 20 मार्च को फांसी होगी? अक्षय की वजह से फंस सकता है पेंच

सार

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने की तारीख तय कर दी है। 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे चारों को मौत दी जाएगी। इस फैसले के बाद निर्भया की मां खुश हैं, लेकिन दोषियों के वकील एपी सिंह का कहना है कि अभी उनके पास कानूनी विकल्प बचे हुए हैं। 

नई दिल्ली. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने की तारीख तय कर दी है। 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे चारों को मौत दी जाएगी। इस फैसले के बाद निर्भया की मां खुश हैं, लेकिन दोषियों के वकील एपी सिंह का कहना है कि अभी उनके पास कानूनी विकल्प बचे हुए हैं। 

फांसी पर कहां फंस सकता है पेंच

निर्भया के दोषी अक्षय की दूसरी दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी गई है। इस याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन को जवाब तलब भी किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस याचिका की वजह से फांसी की तारीख फिर से टाली जा सकती है। 

अक्षय की दूसरी दया याचिका से फंस सकता है पेंच

वकील एपी सिंह ने कहा कि अक्षय की पहली दया याचिका तथ्यों को आभाव में खारिज हो गई थी। इसलिए दूसरी दया याचिका लगाई गई। उसे तिहाड़ जेल प्रशासन ने रिसिव भी किया। लेकिन उसे अब तक आगे नहीं भेजा गया है। कोर्ट ने इसपर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब भी मांगा है कि आखिर वह दया याचिका कहां पर है?

चौथी बार जारी हुआ डेथ वॉरंट

दोषियों को फांसी देने के लिए चौथी बार डेथ वॉरंट जारी हुआ। पहली बार 7 जनवरी को डेथ वॉरंट जारी हुआ था, जिसके मुताबिक 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी देने का आदेश दिया गया। इसके बाद दूसरा डेथ वॉरंट 17 जनवरी को जारी हुआ, दूसरे डेथ वॉरंट के मुताबिक, 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी देना का आदेश था। फिर 31 जनवरी को कोर्ट ने अनिश्चितकाल के लिए फांसी टाली दी। तीसरा डेथ वॉरंट 17 फरवरी को जारी हुआ। इसके मुताबिक 3 मार्च को सुबह 6 बजे फांसी का आदेश दिया गया। फिर चौथी बार डेथ वॉरंट 5 मार्च की जारी हुआ। इसके मुताबिक, 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे फांसी दी जाएगी।

क्या है निर्भया (Nirbhaya) गैंगरेप और हत्याकांड?

दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।  

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