
नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों को जल्द ही फांसी मिलने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फांसी देने की तारीख 16 दिसंबर हो सकती है। इसी दिन उसके (निर्भया) साथ दरिंदगी की गई थी। दोषियों की दया याचिका राष्ट्रपति के पास है। उसपर फैसला होते ही दोषियों को फांसी दे दी जाएगी। खबर है कि फांसी का फंदा भी तैयार किया जाने लगा है।
10 फांसी के फंदे तैयार हो रहे हैं
बिहार के बक्सर जेल अधीक्षक विजय कुमार अरोड़ा के मुताबिक, "मुझे मेरे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 10 फांसी के फंदे तैयार रखने को कहा गया है। मुझे अभी यह नहीं मालूम कि किस जेल से इन फंदों की मांग की गई है। हमने इस पर काम शुरू कर दिया है।"
अफजल गुरु और कसाब के समय भी यहीं बना था फांसी का फंदा
फांसी का फंदा बनाने वाला भारत का इकलौता जेल बिहार में है। जहां अंग्रेजों के जमाने से ही फांसी के लिए फंदा बनाया जाता है। यहीं से बने फंदों को पूरे देश के जेलों में आपूर्ति की जाती है।
यह जगह है बक्सर का सेंट्रल जेल। देश में आखिरी बार संसद पर हमला करने के आरोप में जम्मू-कश्मीर के आतंकी अफजल गुरु को फांसी की दी गई थी। उससे पहले मुंबई आतंकी हमले में जिंदा पकड़ाए पाकिस्तानी आतंकी कसाब को फांसी की सजा दी गई थी। दोनों बक्सर जेल में बने फांसी के फंदे पर ही झूले थे।
अंग्रेजों के जमाने का है पावरलुम मशीन
बक्सर जेल के कैदी और कुशल तकनीकी जानकार फांसी के फंदे को तैयार करते हैं। इसमें सूत का धागा, फेविकोल, पीतल का बुश, पैराशूट रोप का उपयोग होता है। बक्सर जेल में अंग्रेजों के जमाने का एक पावरलुम मशीन है, जो धागों की गिनती कर अलग-अलग करती है। कहा जाता है कि फांसी के एक फंदे में 72 सौ धागों का प्रयोग होता है। फंदे पर 150 किलोग्राम तक के वजन वाले व्यक्ति को झुलाया जा सकता है। यह रस्सी को काफी मुलायम और लचीला होता है।
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