
नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा पर स्थित रेजांग ला युद्ध स्मारक को नष्ट किए जाने के दावे किए गए हैं। कहा गया है कि यह सीमा पर बफर जोन में आता है। इसके चलते इसे नष्ट कर दिया गया है।
विदेश मंत्रालय ने इन दावों को गलत बताया है। शुक्रवार को प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ऐसे दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "रेजांग ला के नायकों के सम्मान में सीमा पर स्मारक बना है। यह लंबे समय से वहां मौजूद है। इस स्मारक में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसको लेकर किए जा रहे दावे गलत हैं।"
कोंचोक स्टैनजिन ने किया था रेजांग ला युद्ध स्मारक नष्ट करने का दावा
अरिंदम बागची प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान उनसे सवाल किया गया कि क्या लद्दाख स्थित रेजांग ला युद्ध स्मारक को चीन के साथ सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में नष्ट किया गया है।
चुशूल के पार्षद कोंचोक स्टैनजिन ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रेजांग ला युद्ध स्मारक को लेकर पोस्ट किया था। उन्होंने दावा किया था कि जिस स्थान पर मेजर शैतान सिंह गिरे थे उसे नष्ट कर दिया गया था। क्योंकि यह 2021 में चीन के साथ बातचीत के बफर जोन में आता था।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि साइट को तोड़ने का काम फरवरी 2021 में किया गया था। उस समय भारत और चीन ने पैंगोंग त्सो में सैनिकों की वापसी की घोषणा की थी। पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट और इसके दक्षिण में एक बफर जोन बनाया गया था।
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आखिरी गोली, आखिरी आदमी, तक चली थी लड़ाई
गौरतलब है कि 1962 में लद्दाख के रेजांग ला में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था। इसमें शहादत देने वाले भारत के वीर सपूतों की याद में स्मारक बनाया गया है। रेजांग ला की प्रसिद्ध लड़ाई में मेजर शैतान सिंह और 113 सैनिकों ने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया था। वे हजारों चीनी सैनिकों की के खिलाफ "आखिरी गोली, आखिरी आदमी" तक लड़ते रहे। सिंह के सम्मान में उसी स्थान पर एक स्मारक बनाया गया था जहां वह गिरे थे।
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