
PM Modi Mother Hiraben Passes Away: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन का शुक्रवार 30 दिसंबर की सुबह निधन हो गया। वे 100 साल की थीं। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार सुबह साढ़े 9 बजे गांधीनगर स्थित श्मशान में किया गया। बता दें कि मंगलवार देर रात सांस लेने में तकलीफ के बाद हीराबा को अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार तड़के साढ़े 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। मां के निधन की खबर खुद पीएम मोदी ने ट्वीट कर दी।
बता दें कि मोदी ने मां हीराबा के 100वें जन्मदिन पर 27 पेज का एक ब्लॉग लिखा था, जिसमें उन्होंने मां की सैकड़ों खूबियों को जिक्र किया है। इसमें पीएम ने अपनी मां के प्यार, त्याग और उनकी ममता का बखान किया है। एक बच्चे के मन में क्या चल रहा है, इसे मां से बेहतर भला कौन समझ सकता है। मेरी मां जिस दर्द से गुजरी, उसे कभी अपनी संतान तक नहीं पहुंचने दिया।
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पशु-पक्षियों को दाना-पानी देना :
मोदी के मुताबिक, मेरी मां की एक और अच्छी आदत रही है, जो मुझे हमेशा याद रही। जीव पर दया करना उनके संस्कारों में झलकता रहा है। गर्मी के दिनों में पक्षियों के लिए वो मिट्टी के बर्तनों में दाना और पानी जरूर रखा करती थीं। जो हमारे घर के आसपास स्ट्रीट डॉग्स रहते थे, वो भूखे ना रहें, मां इसका भी ख्याल रखती थीं।
गौमाता को नियम से रोटी खिलाती थी मां :
पिताजी अपनी चाय की दुकान से जो मलाई लाते थे, मां उससे बड़ा अच्छा घी बनाती थीं और घी पर सिर्फ हम लोगों का ही अधिकार हो, ऐसा नहीं था। घी पर हमारे मोहल्ले की गायों का भी अधिकार था। मां हर रोज, नियम से गौमाता को रोटी खिलाती थी। लेकिन सूखी रोटी नहीं, हमेशा उस पर घी लगा के ही देती थीं। स्ट्रीट डॉग्स को भी खाना देती थीं।
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अन्न बर्बाद न हो, इसका ध्यान रखती थी मां :
भोजन को लेकर मां का हमेशा से ये भी आग्रह रहा है कि अन्न का एक भी दाना बर्बाद नहीं होना चाहिए। हमारे कस्बे में जब किसी के शादी-ब्याह में सामूहिक भोज का आयोजन होता था तो वहां जाने से पहले मां सभी को ये बात जरूर याद दिलाती थीं कि खाना खाते समय अन्न बर्बाद मत करना। घर में भी उन्होंने यही नियम बनाया हुआ था कि उतना ही खाना थाली में लो जितनी भूख हो। मां हमेशा दूसरों को खुश देखकर खुश रहा करती हैं। घर में जगह भले कम हो लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा है।
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साधु-संतों को भोजन कराती थी मां :
हमारे घर के आसपास जब भी कोई साधु-संत आते थे तो मां उन्हें घर बुलाकर भोजन अवश्य कराती थीं। जब वो जाने लगते, तो मां अपने लिए नहीं बल्कि हम भाई-बहनों के लिए आशीर्वाद मांगती थीं। उनसे कहती थीं कि 'मेरी संतानों को आशीर्वाद दीजिए कि वो दूसरों के सुख में सुख देखें और दूसरों के दुख से दुखी हों। मेरे बच्चों में भक्ति और सेवाभाव पैदा हो उन्हें ऐसा आशीर्वाद दीजिए'।
मां को मिल ना सका ममता का आंचल :
पीएम मोदी के मुताबिक, मां को कभी ममता का आंचल नहीं मिला। जब वो छोटी थीं तो मेरी नानी एक वैश्विक महामारी के कारण चल बसीं। इस कारण वे कभी मां से जिद ना कर सकीं। ना ही आंचल में सिर छुपा पाईं। ना स्कूल जा सकीं और ना ही अक्षर का ज्ञान हुआ। हर तरफ गरीबी और अभाव था। उन्हें हमेशा अपनी मां का चेहरा तक ना देख पाने का दर्द चुभता रहा।
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