
नई दिल्ली: देशभर में एक साथ चुनाव कराने की 'एक देश एक चुनाव' नीति लागू हुई तो 2029 में पहली बार एक साथ चुनाव कराने के लिए 8000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एक देश एक चुनाव पर रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की समिति को कुछ महीने पहले चुनाव आयोग ने यह रिपोर्ट सौंपी थी। 2023 के मार्च में कानून आयोग और 2024 के जनवरी में कोविंद समिति को चुनाव आयोग ने जो रिपोर्ट दी थी, उसमें एक साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी सामान, कर्मचारी, संसाधन जैसे कई विषयों की जानकारी दी गई है।
'2029 में एक साथ चुनाव कराने के लिए 7951 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। नए ईवीएम खरीदना, चुनाव कर्मचारियों की तैनाती, मतदाता सूची तैयार करना जैसे कई खर्च हैं। मतदान केंद्रों की संख्या 13.6 लाख तक बढ़ानी होगी। 26.5 लाख ईवीएम की कमी है। अभी हमारे पास सिर्फ 30 लाख ईवीएम हैं। एक चुनाव व्यवस्था लागू करने से पहले स्थानीय निकायों के चुनाव भी एक साथ कराने की व्यवस्था करनी होगी।' रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
एक साथ चुनाव कराने के लिए करीब 7 लाख चुनाव कर्मचारियों की जरूरत होगी। 800 अतिरिक्त गोदामों की जरूरत होगी। अभी सेमीकंडक्टर की आपूर्ति पर्याप्त नहीं है। नए ईवीएम बनाने के लिए सेमीकंडक्टर की जरूरत होती है। रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक देश एक चुनाव नीति को मंजूरी मिली है। संसद में इस बारे में जल्द ही विधेयक पास होने की उम्मीद है।
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