Operation Sindoor से मिली सबक पर अंतरिक्ष में भारत की नई तैयारी, दुश्मनों पर होगी पैनी नजर

Published : Jun 30, 2025, 05:41 PM IST
Satellite

सार

भारत 2029 तक अंतरिक्ष में 52 डिफेंस सैटेलाइट लॉन्च करेगा। ऑपरेशन सिंदूर के सबक से सीखते हुए दुश्मनों पर पैनी नजर रखने की तैयारी है।

Indian Defence Satellites: 7-10 मई 2025 के बीच भारत ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) चलाया। भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और POK में स्थित आतंक के अड्डों को तबाह किया। चार दिन तक पाकिस्तान के साथ लड़ाई लड़ी। इस दौरान मिली सबक पर काम करते हुए भारत 2029 तक अंतरिक्ष में 52 डिफेंस सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है।

एकीकृत रक्षा स्टाफ के तहत डिफेंस स्पेस एजेंसी ने यह पहल शुरू की है। इसपर 26,968 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। इससे चीन, पाकिस्तान और हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार ट्रैकिंग की जा सकेगी। खुफिया जानकारी जुटाई जा सकेगी। TOI की रिपोर्ट के अनुसार चीन तेजी से अंतरिक्ष में डिफेंस सैटेलाइट भेज रहा है। वह एंटी स्पेस हथियारों को विकसित कर रहा है। इसके चलते भारत के लिए भी जरूरी है कि इस दिशा में तेजी से कदम उठाए।

क्या है SBS-3 प्रोग्राम, कौन है इसमें शामिल?

SBS-3 (Space-Based Surveillance) प्रोग्राम अंतरिक्ष आधारित निगरानी के लिए शुरू किया गया है। इसे अक्टूबर 2024 में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति द्वारा स्वीकृति मिली थी। SBS-3 प्रोग्राम में 52 उपग्रह शामिल हैं। इनमें से 21 इसरो द्वारा बनाए और लॉन्च किए जाएंगे। 31 उपग्रह 3 निजी भारतीय कंपनियों द्वारा बनाए जाएंगे। पहला उपग्रह अप्रैल 2026 तक लॉन्च करने का लक्ष्य है। समयसीमा को कम करने और निचली पृथ्वी और भूस्थिर कक्षाओं में तैनाती में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

HAPS विमान लेने की कोशिश कर रही वायुसेना

SBS-3 प्रोग्राम के सभी उपग्रह जब तक तैनात होते हैं तब तक के लिए इंडियन एयरफोर्स तीन HAPS (High-Altitude Platform System) विमानों को लेने की कोशिश कर रही है। ये मानव रहित विमान हैं जो लंबे समय तक समताप मंडल में रहते हैं। इनसे निगरानी की जाती है। ये छद्म उपग्रह भारत के अंतरिक्ष निगरानी मैट्रिक्स को मजबूत करने के लिए पूरक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेंगे।

ऑपरेशन सिंदूर से क्या मिला सबक?

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में खुफिया जानकारी का अहम रोल रहा। भारत ने सीमा पार सैनिकों की आवाजाही और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर नजर रखने के लिए कार्टोसैट क्लास के अपने उपग्रहों के साथ-साथ वाणिज्यिक विदेशी डेटा स्रोतों का इस्तेमाल किया। इस दौरान रियल टाइम में जमीनी हालत पर नजर रखने में भारत की क्षमता में कमियां उजागर हुईं। इसे देखते हुए 52 उपग्रहों को जल्द अंतरिक्ष में पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

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