
नई दिल्ली। विपक्षी दलों के सांसदों ने गुरुवार को पुराने संसद भवन से विजय चौक तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान लोकसभा और राज्यसभा से विपक्षी दलों के 143 सांसदों को निलंबित किए जाने का विरोध किया गया। सांसदों ने 'लोकतंत्र बचाओ' लिखा बैनर लेकर करीब एक किलोमीटर तक मार्च निकाला। इसके साथ ही सांसद नारे लिखी तख्तियां भी लिए हुए थे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भाजपा को लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। अधिकांश विपक्ष को सदन से बाहर कर सरकार ने तीन नए आपराधिक कानून संसद से पास किए। उन्होंने कहा, "हम संसद की सुरक्षा में चूक का मामला उठाना चाहते हैं। हमने लोकसभा के स्पीकर और राज्यसभा के सभापति से बार-बार कहा कि हमें बोलने की अनुमति दें।"
खड़गे ने कहा, "मोदी सरकार ये नहीं चाहती कि सदन चले। लोकतंत्र में सवाल करना हमारा हक है। हम सवाल उठा रहे हैं कि संसद सुरक्षा में जो चूक हुई, उस पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बयान दें। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बाकी जगहों पर बात कर रहे हैं लेकिन वे सदन में बयान नहीं दते हैं, ये सदन का अपमान है।"
संसद में बहस कराने से सरकार ने किया है इनकार
दरअसल, सरकार ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। सरकार ने इस मामले पर संसद में बहस कराने से इनकार किया है। संसद की सुरक्षा का मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अधीन है। उन्होंने कहा है कि पूरी रिपोर्ट विपक्षी सांसदों के लिए उपलब्ध होगी, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब मांग रहा है।
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143 सांसदों को किया गया है निलंबित
13 दिसंबर को संसद की सुरक्षा में लगी सेंध पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा किया जा रहा है। इसके चलते लोकसभा और राज्यसभा से सांसदों का सामूहिक निलंबन हुआ है। लोकसभा से 97 और राज्यसभा से 46 सांसदों को निलंबित किया गया है।
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