
Jammu Kashmir statehood issue: जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा पुन: बहाल किए जाने के लिए गुरुवार को विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई। केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में विपक्षी दलों के नेताओं ने मीटिंग की। केंद्र शासित प्रदेश से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने किया।
पूर्व सीएम फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि पार्टियां इस बात पर सहमत हैं कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी इस मुद्दे पर एक साथ हैं कि जब स्थिति सामान्य हो गई है तो जम्मू-कश्मीर में चुनाव क्यों नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल कांफ्रेंस और महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस नेताओं के साथ केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव की मांग को लेकर भारत के चुनाव आयोग से मुलाकात भी की है।
भारत के ताज को केंद्र शासित प्रदेश बनाना दुर्भाग्यपूर्ण
फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि इलेक्शन कमिशन ने हमें आश्वासन दिया है कि वे इस मामले को देख रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक राज्य जो भारत का ताज है, उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। हम जम्मू-कश्मीर में एक लोकतांत्रिक सरकार चाहते हैं।
मीटिंग में शरद पवार, येचुरी, मनोज झा आदि दिग्गज रहे मौजूद
मीटिंग में शरद पवार और फारूक अब्दुल्ला के अलावा माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा सहित कई दिग्गज विपक्षी नेता शामिल हुए।
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हुआ था समाप्त
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा अगस्त 2019 में समाप्त हुआ था जब संसद में अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद राज्य को दो हिस्सों में बांटते हुए केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया था। इसके पहले जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की सरकार को बीजेपी ने समर्थन देना बंद कर वहां राष्ट्रपति शासन लगाया था।
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