Pahalgam Terror Attack: क्या भारत-पाकिस्तान के बीच शुरू होने जा रहा पहला Water War

Published : Apr 24, 2025, 10:25 AM IST
Indus Water Treaty

सार

Pahalgam Attack: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि स्थगित कर दी है। इससे पाकिस्तान में पानी का संकट गहरा सकता है और कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा। क्या पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आएगा?

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की है। इनमें सबसे बड़ा फैसला भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करना है। कई विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के बीच पानी की पहली जंग की शुरुआत बता रहे हैं।

भारत ने बहुत सावधानी से ‘Abeyance’ (स्थगन) शब्द का प्रयोग किया है। यह संधि बहाल करने का विकल्प खुला रखता है। शर्त यह है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को रोके और अपराधियों को सजा दिलाए। भारत के फैसले का यह मतलब नहीं है कि सभी दरवाजे बंद कर दिए जाएंगे और पानी नहीं बहेगा। यह पानी पर नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम है। अब तक सिंधु जल संधि को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। 23 अप्रैल 2025 को पहली बार भारत ने इस संधि के नियमों में बदलाव किया है।

भारत द्वारा सिंधु जल संधि ‘स्थगित’ करने का मतलब है कि इस मामले में वह पाकिस्तान के साथ सहयोग नहीं करेगा। इससे पाकिस्तान को नदी के पानी के बारे में जानकारी नहीं मिलेगी। पानी का मुक्त प्रवाह नहीं होगा। इसका पाकिस्तान के नदी मैनेजमेंट पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसके चलते पाकिस्तान में आने वाले वर्षों में बड़ा जल संकट पैदा हो सकता है।

सिंधु और इसकी सहायक नदियों के पानी पर निर्भर है पाकिस्तान

पाकिस्तान सिंधु और इसकी सहायक नदियों के पानी पर निर्भर है। इसके पानी का इस्तेमाल सिंध और पंजाब में सिंचाई के लिए होता है। पिछले महीने सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) ने पंजाब और सिंध को चालू फसल सीजन के अंतिम चरण में 35 प्रतिशत पानी की कमी की चेतावनी दी थी।

पाकिस्तान में लंबे समय से सूखा पड़ा हुआ है। बारिश का स्तर औसत से काफी नीचे चला गया है। भारत सरकार के फैसले से पाकिस्तान के लिए स्थिति और खराब हो सकती है। भारत की ओर से सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी को लेकर कोई जानकारी और डेटा नहीं दी जाएगी। इससे पाकिस्तान के लिए नदियों के पानी को मैनेज करना मुश्किल हो जाएगा।

अपनी हरकतों से बाज न आया पाकिस्तान तो पानी के लिए तरसेगा

सिंधु जल संधि के तहत सिंधु सिस्टम की 6 नदियों को दो कैटेगरी में बांटा गया है। सिंधु, झेलम और चिनाब नदी का पानी पाकिस्तान को मिला है। भारत इन नदियों के पानी को स्टोर नहीं कर सकता। नदी के रास्ते में बदलाव नहीं कर सकता। वहीं, रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी पर भारत को पूरा नियंत्रण मिला था। ये नदियां भारत से बहकर पाकिस्तान जाती हैं। अब जब भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है भारत के पास पाकिस्तान के हिस्से वाली नदियों के पानी का पूरा इस्तेमाल करने का विकल्प मौजूद है।

भारत ने पाकिस्तान को पानी के मुक्त प्रवाह को रोकने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया है। भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि उसके पास दो विकल्प हैं- या तो वह सीमा पार आतंकवाद को रोके और संधि को बहाल करवाए या फिर अपनी राह पर चलता रहे और भारत को पानी के मुक्त प्रवाह को रोकने के लिए मजबूर करे।

सिंधु बेसिन सिंचाई सिस्टम पर निर्भर है पाकिस्तान का कृषि उत्पादन

पाकिस्तान दुनिया के सबसे शुष्क देशों में से एक है। यहां साल भर में औसत वर्षा लगभग 240 मिलियन होती है। यह एकल बेसिन वाला देश है। यह अपने जल संसाधनों पर 76 प्रतिशत निर्भर है। पाकिस्तान के कुल कृषि उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत सिंधु बेसिन सिंचाई सिस्टम पर निर्भर है। भारत ने पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोका तो पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र तबाह हो जाएगा। पीने तक को पानी नहीं मिलेगा।

सिंधु जल संधि से पाकिस्तान को मिली हुई थी राहत

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी। विश्व बैंक ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की थी। इस संधि से अब तक पाकिस्तान नदी के प्रवाह पर भारत के नियंत्रण से बचा हुआ था। 1960 के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई युद्ध हुए। राजनीतिक तनाव चरण पर पहुंचा, लेकिन इस संधि को बनाए रखा गया। संधि के शब्दों में किसी भी पक्ष द्वारा एकतरफा वापसी या निरस्तीकरण का प्रावधान नहीं है। यही कारण है कि भारत ने निलंबन या निरस्तीकरण के बजाय ‘स्थगित’ शब्द का उपयोग करने का चतुराईपूर्ण कदम उठाया है। उम्मीद है कि पाकिस्तान इस निर्णय के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय संगठनों के दरवाजे खटखटाएगा और इसे संधि का उल्लंघन कहेगा।

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