
Saurashtra-Tamil Sangamam. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) 26 अप्रैल को सुबह 10.30 बजे सौराष्ट्र-तमिल संगमम (ST Sangamam) के क्लोजिंग सेरेमनी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। यह कार्यक्रम 10 दिनों तक चला। इससे पहले काशी-तमिल संगमम कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा चुका है। यह कार्यक्रम हमेशा याद किया जाएगा, जिससे दो राज्यों के बीच अभूतपूर्व सांस्कृतिक जुड़ाव संभव हुआ है। यह दोनों राज्यों के लोगों के बीच सेतु का भी काम करेगा। प्रधानमंत्री क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान कार्यक्रम के अनुभवों की चर्चा की।
एक भारत-श्रेष्ठ भारत की पहल
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार यह कार्यक्रम एक भारत-श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना के अनुसार तैयार किया गया है। इससे देश के दो अलग-अलग हिस्सों के लोग एक मंच पर आकर सांस्कृतिक विरासत साझा करते हैं। राज्यों के बीच सदियों पुराने रिश्ते को फिर से परिभाषित किया जाता है। दो राज्यों के लोग एक-दूसरे की कला, संस्कृति, भाषा, रहन-सहन आदि से पूरी तरह परिचित होते हैं। ज्ञान का आदान-प्रदान होता है। सौराष्ट्र-तमिल संगमम से पहले काशी-तमिल संगमम कार्यक्रम का सफल आयोजन किया जा चुका है। वह कार्यक्रम भी बेहद सफल रहा और उसमें भाग लेने वालों ने पीए मोदी को धन्यवाद दिया था।
कैसा रहा सौराष्ट्र-तमिल संगमम
सौराष्ट्र-तमिल संगमम गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों की साझा विरासत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। माना जाता है कि गुजरात के सौराष्ट्र से काफी लोग तमिलनाडु पहुंचे और वहीं पर बस गए। पीएमओ की मानें तो सौराष्ट्र तमिल संगमम ने सौराष्ट्र के तमिलों को फिर से अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका दिया है। यह कार्यक्रम 10 दिन चला और करीब 3000 लोगों ने इसमें पार्टिसिपेट किया। सभी लोग एक विशेष ट्रेन से सोमनाथ के दर्शन करने भी पहुंचे। 26 अप्रैल को कार्यक्रम का समापन हो रहा है और पीएम मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ेंगे।
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