मोदी सरकार में बने नीति आयोग ने खत्म कर दिया था स्पेशल स्टेटस, जानिए पूरा इतिहास

Published : Jul 22, 2024, 03:47 PM ISTUpdated : Jul 22, 2024, 03:49 PM IST
Nitish kumar with Pm Modi

सार

देश में सबसे पहली बार किसी भी राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा दिए जाने संबंधी पहली बार बात 1969 में राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की मीटिंग में आई थी। एनडीसी की मीटिंग में डीआर गाडगिल कमेटी ने केंद्रीय सहायता आवंटन करने के लिए एक फार्मूला सुझाया था।

Special Status for states: पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने से इनकार कर दिया है। एनडीए का प्रमुख घटक दल जेडीयू, लंबे समय से बिहार को स्पेशल स्टेटस दिए जाने की मांग कर रहा था। दरअसल, 2014 में योजना आयोग के भंग किए जाने और नीति आयोग के गठन के बाद देश में किसी भी राज्य को स्पेशल स्टेटस देने का प्रावधान खत्म हो गया है। केंद्र सरकार ने नीति आयोग के अस्तित्व में आने के बाद वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए विशेष राज्यों को दिए जाने वाले अनुदानों को भी बंद कर दिया।

कब शुरू किया था विशेष श्रेणी का दर्जा दिए जाने का प्रावधान

दरअसल, देश में सबसे पहली बार किसी भी राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा दिए जाने संबंधी पहली बार बात 1969 में राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की मीटिंग में आई थी। एनडीसी की मीटिंग में डीआर गाडगिल कमेटी ने केंद्रीय सहायता आवंटन करने के लिए एक फार्मूला सुझाया था। डीआर गाडगिल कमेटी ने स्पेशल स्टेटस सहित अन्य राज्यों को धन आवंटन के लिए जो फार्मूला बनाया था, वह देश में लागू किया गया पहला फार्मूला था जिससे धन आवंटन में सहूलियतें होने लगी। क्योंकि इसके पहले केंद्रीय धन आवंटन, राज्यों को कैसे हो इसको लेकर कोई नियम-तरीका नहीं तय था। राज्यों को केंद्रीय धन आवंटन अनुदान योजना के तहत पूर्व में दिए जाते थे। गाडगिल फार्मूला को एनडीसी ने मंजूर कर लिया।

गाडगिल फार्मूला से मिला कई राज्यों को स्पेशल स्टेटस

राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा गाडगिल फार्मूला मंजूर किए जाने और लागू किए जाने के बाद कई राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा भी मिल गया। इस फार्मूला के तहत देश के कई राज्यों को केंद्रीय धन की अधिक आवश्यकता बतायी गई। गाडगिल फार्मूला के लागू होते ही असम, जम्मू और कश्मीर, और नागालैंड जैसे राज्यों को स्पेशल स्टेट मिल गया। इन राज्यों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी गई।

1969 में ही पांचवें वित्त आयोग ने विशेष श्रेणी का दर्जा दिए जाने के लिए एक कांसेप्ट पेश किया। वित्त आयोग ने कहा कि विशेष श्रेणी का दर्जा पाने वाले कुछ कमजोर राज्यों को केंद्रीय सहायता और कर छूट जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएं। राष्ट्रीय विकास परिषद ने इस दर्जा के आधार पर केंद्रीय योजना सहायता का आवंटन किया।

मोदी सरकार ने खत्म कर दिया स्पेशल स्टेटस

2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता संभाली। पीएम मोदी के नेतृत्व में बनी बीजेपी सरकार ने योजना आयोग को भंग किया। योजना आयोग की जगह पर नीति आयोग अस्तित्व में लाया गया। नीति आयोग के अस्तित्व में आने के बाद 14वें वित्त आयोग ने सिफारिश किया कि गाडगिल फार्मूला पर दिए जाने वाले अनुदानों को बंद किया जाए। नीति आयोग ने वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू किया और राज्यों को मिलने वाला स्पेशल स्टेटस खत्म कर दिया। वित्त वर्ष 2014-2015 तक, 11 विशेष श्रेणी के राज्यों ने विभिन्न लाभ और प्रोत्साहनों लिए थे। 14वां वित्त आयोग की सिफारिश पर ही सभी राज्यों के लिए विभाज्य पूल से वितरण को 32% से बढ़ाकर 42% कर दिया गया।

अब जानिए 14वें और 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें

14वें वित्त आयोग ने 2015 से 2020 की अवधि के लिए शेयर योग्य टैक्सों के हॉरिजांटल वितरण में सामान्य श्रेणी और विशेष श्रेणी राज्यों के बीच भेद खत्म कर दिया। राज्यों के लिए शेयर योग्य टैक्सों का हिस्सा 32% से बढ़ाकर 42% कर दिया गया। 15वें वित्त आयोग ने इस दर को 2020-2021 और 2021-2026 की अवधि के लिए 41% पर बनाए रखा। इसमें जम्मू और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के कारण 1% समायोजन भी शामिल रहा। यह समायोजन प्रत्येक राज्य की संसाधन अंतर को टैक्स डेवोल्यूशन के माध्यम से संबोधित करने के लिए किया गया था, जहां केवल टैक्स डेवोल्यूशन से अंतर को कवर नहीं किया जा सकता था, वहां पोस्ट-डेवोल्यूशन राजस्व घाटा अनुदान प्रदान किया गया।

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