
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NEET UG 2024 पेपर लीक मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें कोर्ट से परीक्षा रद्द करने की गुहार लगाई गई है। सुनवाई के दौरान CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि लीक 4 मई से पहले हुआ था।
CJI के साथ जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग बयान दिए जाने पर चिंता जताई। याचिकाकर्ताओं के वकील नरेंद्र हुड्डा ने कोर्ट को बताया कि एनटीए ने जो रिजल्ट घोषित किए हैं उसमें कई गड़बड़ियां हैं। एजेंसी ने परीक्षा केंद्रों की अखिल भारतीय रैंक और सीरियल नंबर नहीं दिए हैं। रिजल्ट जारी करने के नाम पर 5,000 पीडीएफ दिए हैं।
बैंकों में जमा होने से पहले ही लीक हो गया था पेपर
नरेंद्र हुड्डा ने दावा किया कि पेपर बैंकों में जमा होने से पहले ही लीक हो गया था। प्रश्नपत्र ई-रिक्शा से ले जाया गया था। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ओएमआर शीट ई-रिक्शा से ढोया गया था। यह सुनकर सीजेआई चंद्रचूड़ बोले, "ई-रिक्शा द्वारा प्रश्नपत्र ले जाया जाना स्थापित तथ्य है। छोटी सी बात यह है कि जो तस्वीर बांटी गई वह ओएमआर शीट की थी, न कि प्रश्नपत्र की।"
4 मई को लीक हुआ था नीट का पेपर
हुड्डा ने जवाब दिया कि पेपर लीक हुआ था। इसे व्हाट्सएप पर शेयर किया गया। बिहार पुलिस की जांच से पता चलता है कि लीक 4 मई को हुआ था। बैंकों में प्रश्नपत्र जमा करने से पहले हुआ लीक हो गया था। लीक के पीछे पूरे गिरोह का हाथ है। यह किसी चपरासी द्वारा पेपर लीक का मामला नहीं है। बिहार पुलिस से कहा गया है कि इस मामले जुड़ी केस डायरी, रिपोर्ट जैसी सभी सामग्री पेश की जाए।
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सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि दलाल अमित आनंद 4 मई की रात को छात्रों को जुटा रहा था ताकि 5 मई को लीक हुए पेपर हासिल कर सके। इसपर सीजेआई ने कहा, "इससे पता चलता है कि छात्रों को 4 मई की शाम को याद करने के लिए कहा गया था। इसका मतलब है कि पेपर लीक 4 मई से पहले हुआ था।
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