
PM Modi Major Economic Decisions: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। 2014 में पीएम बनने के बाद मोदी के नेतृत्व में कई बड़े इकोनॉमिक डिसीजन लिए गए, जिनका फायदा लोकल लेवल पर हुआ ही, ग्लोबली भी भारत ने खूब तरक्की की। यहां तक कि भारत का नाम दुनिया की टॉप-5 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ। आइए जानते हैं पीएम मोदी के 11 सबसे बड़े इकोनॉमिक फैसलों के बारे में।
2017 में लागू जीएसटी ने 17 तरह के टैक्स और 13 एक ही कर में मिला दिया। एक्टिव जीएसटी टैक्सपेयर्स की संख्या 60 लाख से बढ़कर लगभग 1.51 करोड़ हो गई। वित्त मंत्रालय की एक स्टडी में पाया गया कि जीएसटी ने परिवारों को कुल मासिक खर्चों पर कम से कम 4% की बचत करने में मदद की।
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जन धन योजना और मुद्रा योजना जैसी पहलों ने उन करोड़ों भारतीयों के लिए वित्तीय समावेशन सुनिश्चित किया, जो पहले बैंकिंग सेवाओं से वंचित थे। 56 करोड़ से अधिक जन-धन खातों के साथ कई खातों को फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम के दायरे में लाया गया।
डिजिटल इंडिया ने हर एक चीज में तकनीक को शामिल कर गवर्नेंस के साथ ही लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बदल दिया। दुनिया के 50% से अधिक रियल टाइम ट्रांजेक्शन भारत में UPI के माध्यम से हो रहे हैं। डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर ने फर्जी लाभार्थियों को हटाकर सरकार को 4.31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत कराई है।
मेक इन इंडिया और प्रोडक्शन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना ने मिलकर भारत को आयात के बाजार से मैनुफैक्चरिंग और निर्यात के ग्लोबल सेंटर में बदलने का काम किया है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैनुफैक्चरर देश है।
2014 से सरकार ने 42,000 से ज्यादा कम्पाइलेंस (अनुपालनों) को कम किया है। साथ ही 3700 से ज्यादा कानूनी प्रावधानों को गैर-अपराधीकरण किया है, जिससे उद्यमों को लंबे समय से रोकने वाली बाधाएं दूर हुई हैं। नेशनल सिंगल विंडो अप्रूवल सिस्टम की त्वरित मंजूरी के साथ अब बिजनेस शुरू करना और चलाना बेहद आसान और तेज हो गया है।
इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड से संकटग्रस्त कंपनियों को रिवाइव करने, लेनदारों का विश्वास बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने के लिए एक स्पष्ट, टाइम बाउंड मैकेनिज्म देकर भारत के दिवालियापन ढांचे को बदल दिया है। मार्च 2025 तक, 1194 कंपनियों का समाधान किया गया था, जिसमें लेनदारों को 3.89 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई, जबकि ग्रॉस एनपीए 2.3% के कई दशक के निचले स्तर पर आ गया, जो मजबूत बैंकिंग सेक्टर की हेल्थ को दिखाता है।
2014 से मोदी सरकार ने व्यक्तियों के लिए इनकम टैक्स राहत का लगातार विस्तार किया है, जिससे छूट सीमा बढ़ाकर मध्यम वर्ग पर बोझ कम किया गया है। 2025 में 12 लाख (वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 12.75 लाख रुपये) तक की आय पूरी तरह टैक्स फ्री कर दी गई है।
2019 में 27 सरकारी बैंकों का 12 मजबूत संस्थाओं में विलय हो गया, जिससे बैंकिंग सेक्टर में एफिशिएंसी और स्केल बड़े पैमाने पर बढ़ा। ग्रॉस एनपीए 2018 में 11.2% से गिरकर 2024 में 5% से के नीचे आ गया, जिससे बैंकिंग स्टेबिलिटी में मजबूत आई।
वैश्विक झटकों के बावजूद भारत की राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के माध्यम से महंगाई दर 8.2% (2004-14) से घटकर लगभग 5% (2015-25) हो गई। जीडीपी 2014-15 में 106 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में अनुमानित 331 लाख करोड़ रुपये हो गई।
आर्थिक विकास को गति देने के लिए 2014 से ही मोदी सरकार एक व्यवस्थित, लॉन्गटर्म इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लान डेवलप करने पर फोकस करती रही है। नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन, पीएम गतिशक्ति, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और नेशनल हाइवे के व्यापक विस्तार जैसी पहलों ने व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है।
2019 में वर्तमान सरकार ने घरेलू कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दरों को घटाकर 22% और नई डोमेस्टिक कंपनियों के लिए 15% कर दिया। साथ ही अन्य कई वित्तीय राहतें भी दीं। ये दरें अब एशिया में सबसे आकर्षक दरों में से हैं, जिससे भारत ग्लोबल बिजनेसेस के लिए एक मजबूत ऑप्शन बन गया है।
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