
कानपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तर प्रदेश के कानपुर दौरे पर हैं। यहां वे नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इससे पहले पीएम मोदी ने चंद्रशेखर आजाद को पुष्पांजलि अर्पित की।
आज नेशनल गंगा काउंसिल की पहली बैठक है। इसमें शामिल होने के लिए 12 केंद्रीय मंत्री, 9 केंद्रीय विभागों के सचिव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री को बुलाया गया है। हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने बैठक में शामिल होने की सूचना नहीं भेजी है। मोदी नमामि गंगे प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी एक स्पेशल स्टीमर में सवार होकर गंगा में सैर करेंगे।
डबल डेकर बोट से करेंगे सैर
प्रधानमंत्री मोदी का सुबह चकेरी हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। वहां से वे हेलिकॉप्टर से चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय पहुंचेंगे। जहां राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में शामिल होंगे और स्थितियों की समीक्षा करेंगे। बैठक के बाद मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ गंगा के अटल घाट जाएंगे। यहां से वे जाजमऊ तक गंगा नदी में नौकायन करके नमामि गंगे परियोजना के असर का निरीक्षण करेंगे। इसके लिए प्रयागराज से डबल डेकर मोटर बोट मंगाई गई है। प्रधानमंत्री कानपुर में करीब चार घंटे रहेंगे।
पीएम मोदी कर सकते हैं घोषणा
2071 किमी भूभाग में प्रवाहित होने वाली गंगा नदी का कानपुर में पड़ने वाला हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित माना जाता है। कानपुर में होने वाली इस बैठक से सरकार संदेश देना चाहती है कि वह नमामि गंगे परियोजना के प्रति गंभीर है। गंगा और उसकी सहायक नदियों को अविरल बनाना भाजपा के एजेंडे में शामिल है। प्रधानमंत्री यहां नमामि गंगे परियोजना को लेकर कुछ घोषणाएं कर सकते हैं।
नाले की सफाई पर खर्च हुआ 28 करोड़
कानपुर में 128 साल पुराना सीसामऊ नाला एशिया में सबसे बड़ा है। अंग्रेजों ने शहर के गंदे पानी की निकासी के लिए इसका निर्माण किया था। करीब 40 मोहल्लों से सीसामऊ नाले से रोजाना 14 करोड़ लीटर प्रदूषित पानी गंगा में गिरता था। अब नमामि गंगे परियोजना के तहत 28 करोड़ रुपए की लागत से इसे साफ किया गया है। इसे डायवर्ट कर वाजिदपुर और बिनगवां ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जा रहा है।
गंगा नदी रहेगी साफ
ट्रीटमेंट प्लांट के बन जाने से टेनरी मालिकों को भी राहत मिलेगी और गंगा नदी में गिरने वाले प्रदूषण पर भी रोक लग सकेगी। बता दें कि जाजमऊ में 400 से अधिक टेनरियां हैं। वाजिदपुर में अभी 36 एमएलडी का कॉमन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है, इसमें टेनरियों के नौ एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट है। जबकि टेनरी से इसका तीन गुना केमिकल युक्त पानी निकलता है। पानी अधिक और क्षमता कम होने की वजह से शोधन नहीं हो पा रहा था और इन टेनरियों को दिसंबर में कुंभ से पहले बंद कर दिया गया था।
क्या है नमामि गंगे प्रोजेक्ट?
गंगा और इसकी सहायक नदियों का प्रदूषण खत्म करने और इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए 2014 में केंद्र सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस परियोजना की जिम्मेदारी केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प को दी गई है। परियोजना की अवधि 18 साल है। सरकार ने 2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20 हजार करोड़ रुपए का बजट तय किया है।
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