संविधान दिवस पर बोले PM मोदी, देश ने संविधान पर नहीं आने दी आंच, जिससे बना पाए एक भारत-श्रेष्ठ भारत

Published : Nov 26, 2019, 12:06 PM IST
संविधान दिवस पर बोले PM मोदी, देश ने संविधान पर नहीं आने दी आंच, जिससे बना पाए एक भारत-श्रेष्ठ भारत

सार

संविधान दिवस के मौके पर संसद भवन के सेंट्रल हॉल में लोकसभा राज्यसभा की संयुक्त बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त बैठक को संबोधित किया। मोदी ने कहा, ‘‘अंबेडकर ने 25 नवंबर 1949 को याद दिलाया था कि भारत पहली बार 1947 में आजाद हुआ है या फिर 29 जनवरी 1950 में गणतंत्र हुआ है।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संविधान दिवस के मौके पर संसद भवन के सेंट्रल हॉल में लोकसभा राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत का संविधान ऐतिहासिक है। 70 साल पहले हमने संविधान को अपनाया। संविधान के दायरे में हमने कई सुधार किए, जो जरूरी थे। मोदी ने कहा, ‘‘अंबेडकर ने 25 नवंबर 1949 को याद दिलाया था कि भारत पहली बार 1947 में आजाद हुआ है या फिर 29 जनवरी 1950 में गणतंत्र हुआ है।

पहले भी हम गणतंत्र थे 

ऐसा नहीं है। हमारे यहां पहले भी गणतंत्र था। हमने पहले भी आजादी गंवाई है और गणतंत्र भी। बाबा ने याद दिलाया - हम गणतंत्र हुए हैं, क्या हम आजादी बनाए रख सकते हैं। आज बाबा होते तो उन्हें खुशी होती। आज भारत ने उनके सवालों का न सिर्फ जवाब दिया है बल्कि भारत ने खुद को सशक्त और अक्षुण बना रखा है। मैं विशेष तौर 130 करोड़ भारतीयों के प्रति नतमस्तक हूं। उन्होंने कभी भी इसे झुकने नहीं दिया। इसे उन्होंने मार्गदर्शन माना। देशवासियों ने संविधान पर आंच नहीं आने दी। संविधान की मजबूती के कारण एक भारत-श्रेष्ठ भारत बना पाए हैं।’’ 

ज्ञान का महाकुंभ था सदन 

दोनों सदनों को ज्वाइंट सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘आज ही के दिन 70 साल पहले संविधान के एक-एक अनुच्छेद पर चर्चा हुई। संकल्पों पर चर्चा हुई। यह सदन ज्ञान का महाकुंभ था। भारत के हर कोने में सपनों को मढ़ने का प्रयास हुआ था। राजेंद्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी, हंसा मेहता, गोपाल स्वामी आयंगर ने प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष योगदान दिया था। आज मैं उन सभी को नमन करता हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘संविधान की भावना एक पंथ है। यह हमारा पवित्र ग्रंथ है। ऐसा ग्रंथ जिसमें हमारा जीवन, मूल्य, व्यवहार, परंपरा आदि का समावेश हैं। साथ ही इसमें चुनौतियों का समाधान भी है। इसमें बाहरी प्रकाश के लिए खिड़कियां खोल रखी है और अंदर के प्रकाश को अधिक प्रज्वलित करने का अवसर दिया है। मैंने लाल किले की प्राचीर से जो कहा था उसे मैं दोहराता हूं। डिग्निटी फॉर इंडियन और यूनिटी फॉर इंडिया। इसने भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बना रखा है। संविधान में ही अधिकार की बात है और कर्तव्यों का अनुपालन भी हैं।’’

नए भारत के निर्माण का संकल्प लें 

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला सासंदों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘‘आज हम भारतीय संविधान की 70वीं वर्षगांठ पर एकत्रित हुए हैं। आज के दिन एक नया इतिहास रचा गया था। जब हमें स्वतंत्रता मिली थी तब हम पर संविधान निर्माण करने की महती जिम्मेदारी थी। भीमराव अंबेडकर ने सभी भारतीयों के साथ मिलकर संविधान का निर्माण किया। हमारा संविधान भारतीय संस्कृति और समाज का आईना है। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिए हैं और मौलिक कर्तव्य भी दिए हैं। मौलिक कर्तव्य 51 (ए) को अपने जीवन में उतारे तो यह मानव जीवन को परिवर्तित कर देगा। भारत की संप्रभुता, एकता अखंडता को बनाए रखें। हम वैज्ञानिक सोच को विकसित करते हुए श्रेष्ठता हासिल करें। समय आ गया है हम सांसद देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत करें कि हम इसका अनुसरण करें और दूसरों को अनुपालन करने को कहें। हमें संविधान को अपना पथ-प्रदर्शक बनाना होगा। आज हम इस गौरवपूर्ण क्षण में नए भारत के निर्माण का संकल्प लें।’’ गौरतलब है कि संविधान को देश में  लागू किया गया था. तब से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

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