
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय अभिधम्म दिवस और पाली को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दिए जाने के लिए आयोजित एक समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा- भले ही पाली वर्तमान में प्रचलन में नहीं है, लेकिन एक भाषा, साहित्य, कला और आध्यात्मिक परंपराएं किसी राष्ट्र की विरासत को व्यक्त करती हैं, जो उसकी पहचान है। भारत सरकार पाली को संरक्षित करने के साथ ही बढ़ावा देगी।
पाली के जरिये भगवान बुद्ध के संदेश को जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार 17 अक्टूबर को ऐलान किया कि सरकार पाली भाषा और उसमें लिखे पवित्र ग्रंथों, बुद्ध की शिक्षाओं के संरक्षण और विकास के लिए कई पहल करेगी। उन्होंने कहा- पाली वह भाषा थी, जिसमें अभिधम्म दिवस के दिन भगवान बुद्ध की शिक्षाएं व्यक्त की गई थीं और अब इस भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा- धम्म को समझने के लिए पाली सबसे अहम है। एक भाषा केवल संचार का तरीका नहीं है, बल्कि एक सभ्यता, उसकी संस्कृति, उसकी विरासत की आत्मा है। पाली को जीवित रखना और इसके माध्यम से बुद्ध के संदेश को जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी है।
पिछले कुछ सालों में 600 कलाकृतियां भारत वापस लाए
संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा- आजादी से पहले सदियों तक औपनिवेशिक शासन और आक्रमणकारियों ने भारत की पहचान को मिटाने की कोशिश की। वहीं, आजादी के बाद ‘गुलाम मानसिकता’ वाले लोगों ने ऐसा किया। उस समय के ईको-सिस्टम ने भारत को उसकी विरासत से दूर कर बहुत पीछे धकेल दिया । अब भारत सरकार बौद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। पिछले कुछ सालों में हम 600 से अधिक कलाकृतियां भारत वापस लाए हैं, जिनमें से अधिकांश बौद्ध वस्तुएं हैं।
साइंस-टेक्नोलॉजी के साथ अपनी संस्कृति पर भी गर्व करें युवा
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा- हम ऐप, डिजिटलीकरण और अभिलेखीय शोध के माध्यम से पाली को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। पाली को समझने के लिए शैक्षणिक और आध्यात्मिक दोनों प्रयासों की जरूरत है। विद्वानों और शिक्षाविदों को बुद्ध धम्म को समझने में लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा- बुद्ध की विरासत के पुनरुद्धार में भारत अपनी पहचान को फिर से गढ़ रहा है। देश के युवाओं को संदेश देते हुए पीएम ने कहा- भारत के युवाओं को न केवल साइंस और टेक्नोलॉजी में दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए, बल्कि अपनी संस्कृति, मूल्यों और जड़ों पर भी गर्व होना चाहिए।
भारत में अभी 11 शास्त्रीय भाषाएं
केंद्रीय कैबिनेट ने 3 अक्टूबर को पाली के अलावा मराठी, प्राकृत, असमिया और बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दी थी। बता दें कि भारत में अभी 11 शास्त्रीय भाषाएं हैं, जिनमें तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं।
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