PM मोदी ने स्टैच्यू ऑफ पीस का अनावरण किया, बोले- यह प्रतिमा विश्व मे शांति, अहिंसा का प्रेरणा स्रोत बनेगी

Published : Nov 16, 2020, 09:00 AM ISTUpdated : Nov 16, 2020, 01:17 PM IST
PM मोदी ने स्टैच्यू ऑफ पीस का अनावरण किया, बोले- यह प्रतिमा विश्व मे शांति, अहिंसा का प्रेरणा स्रोत बनेगी

सार

पीएम मोदी ने सोमवार को जैनआचार्य श्री विजय वल्लभ सुरिश्वर जी महाराज की 151वीं जयंती समारोह के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘स्टैच्यू ऑफ पीस’ का अनावरण किया।

नई दिल्ली. पीएम मोदी ने सोमवार को जैनआचार्य श्री विजय वल्लभ सुरिश्वर जी महाराज की 151वीं जयंती समारोह के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘स्टैच्यू ऑफ पीस’ का अनावरण किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, मेरा सौभाग्य है कि मुझे देश ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लोकार्पण का अवसर दिया था। और आज जैनाचार्य विजय वल्लभ जी की भी 'स्टैच्यू ऑफ पीस' के अनावरण का सौभाग्य मुझे मिल रहा है। 

उन्होंने कहा, भारत ने हमेशा पूरे विश्व को, मानवता को, शांति, अहिंसा और बंधुत्व का मार्ग दिखाया है। ये वो संदेश हैं जिनकी प्रेरणा विश्व को भारत से मिलती है। इसी मार्गदर्शन के लिए दुनिया आज एक बार फिर भारत की ओर देख रही है। 

'अहिंसा और सेवा का प्रेरणा स्रोत बनेगी ये प्रतिमा'
पीएम ने कहा, मुझे विश्वास है कि ये 'स्टैच्यू ऑफ पीस' विश्व मे शांति, अहिंसा और सेवा का एक प्रेरणा स्रोत बनेगी। आप भारत का इतिहास देखें तो महसूस करेंगे, जब भी भारत को आंतरिक प्रकाश की जरूरत हुई है, संत परंपरा से कोई न कोई सूर्य उदय हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा, आप भारत का इतिहास देखें तो महसूस करेंगे, जब भी भारत को आंतरिक प्रकाश की जरूरत हुई है, संत परंपरा से कोई न कोई सूर्य उदय हुआ है। कोई न कोई बड़ा संत हर कालखंड में हमारे देश में रहा है, जिसने उस कालखंड को देखते हुए समाज को दिशा दी है। आचार्य विजय वल्लभ जी ऐसे ही संत थे। 

'आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करें संत'
पीएम ने कहा,  आज 21वीं सदी में मैं आचार्यों, संतों से एक आग्रह करना चाहता हूं कि जिस प्रकार आजादी के आंदोलन की पीठिका भक्ति आंदोलन से शुरु हुई। वैसे ही आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करने का काम संतों, आचार्यों, महंतों का है।

पीएम ने कहा, महापुरुषों का, संतों का विचार इसलिए अमर होता है, क्योंकि वो जो बताते हैं, वही अपने जीवन में जीते हैं। आचार्य विजय वल्लभ जी कहते थे कि साधु, महात्माओं का कर्तव्य है कि वो अज्ञान, कलह, बेगारी, आलस, व्यसन और समाज के बुरे रीति रिवाजों को दूर करने के लिए प्रयत्न करें। 

कौन थे विजय वल्लभ सुरिश्वर जी महाराज
श्री विजय वल्लभ सुरिश्वर जी महाराज (1870-1954) ने एक जैन संत के रूप में सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए निस्वार्थ और समर्पण भाव से भगवान महावीर के संदेश को फैलाने का काम किया। उन्होंने जनता के कल्याण, शिक्षा के प्रसार, सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के लिए भी अथक परिश्रम किया। 

उनकी प्रेरणा से, कई राज्यों में कॉलेजों, स्कूलों और अध्ययन केंद्रों सहित 50 से अधिक शिक्षण संस्थान संचालित हैं। उनके सम्मान में अनावरण की जाने वाली प्रतिमा को स्टैच्यू ऑफ पीस का नाम दिया गया है। 151 इंच ऊंची, यह प्रतिमा अष्टधातु यानी 8 धातुओं से बनाई गई है, जिसमें तांबा प्रमुख घटक है, और इसे राजस्थान के पाली में विजय वल्लभ साधना केंद्र, जैतपुरा में स्थापित किया जा रहा है।

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