PM Security Breach: सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे जांच, एनआईए के डीजी और पंजाब के एडीजी IB भी कमेटी में

Published : Jan 10, 2022, 09:05 AM ISTUpdated : Jan 10, 2022, 12:24 PM IST
PM Security Breach: सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे जांच, एनआईए के डीजी और पंजाब के एडीजी IB भी कमेटी में

सार

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की तीन सदस्‍यीय बेंच इस मामले की सुनवाई की। सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि पीएम सुरक्षा में चूक मामले की जांच अब सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। इस जांच कमेटी में एनआईए के डीजी और पंजाब के एडीजी इंटेलिजेंस ब्यूरो भी शामिल होंगे। 

नई दिल्ली। पंजाब (Punjab) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में चूक किए जाने के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में फिर सुनवाई की। सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि पीएम सुरक्षा में चूक मामले की जांच अब सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। इस जांच कमेटी में एनआईए के डीजी और पंजाब के एडीजी इंटेलिजेंस ब्यूरो भी शामिल होंगे। इससे पहले पंजाब सरकार के महाधिवक्ता डीएस पटवालिया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित रख लिया है। राज्य के 7 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों ना की जाए। पंजाब सरकार चाहती है कि कृपया, एक स्वतंत्र समिति नियुक्त की जाए और निष्पक्ष जांच हो। केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार की समिति की कार्यवाही रुकने से पहले डीजी और पंजाब के मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। उनका कहना है कि नियुक्त समिति ने कोई जांच नहीं की। CJI रमना ने कहा कि हम जारी किए गए जांच नोटिस की समय-सीमा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और ये भी देख रहे हैं कि आगे किसे जांच करनी है।

सुप्रीम कोर्ट में पीएम सुरक्षा चूक मामले में सुनवाई...
SG तुषार मेहता :
हम डीजी और मुख्य सचिव को जारी कारण बताओ नोटिस पर भरोसा कर रहे हैं। कुछ भ्रांतियां हैं। समिति की नियुक्ति से कोई सुनवाई नहीं होती है। कृपया, सुरक्षा शब्द की परिभाषा देखें। एसपीजी का क्या कार्य है?
SG: पीएम का काफिला उस स्थान पर पहुंच गया था जो विरोध क्षेत्र से 100 मीटर दूर था। 
SG: कृपया, एसपीजी अधिनियम की धारा 4 देखें। ब्लू बुक नाम की एक किताब है, जो पीएम की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले सूक्ष्म कदमों की जानकारी देती है। ब्लू बुक के अनुसार यह अधिकारियों पर निर्भर होगा कि नियमों को सख्ती से लागू किया जाए और राज्य सरकार ऐसे अधिकारियों को निर्देशित करें, ताकि वहां किसी तरह की असुविधा ना हो।
जस्टिस सूर्यकांत: आपका कारण बताओ नोटिस पूरी तरह से विरोधाभासी है। समिति गठित करके आप पूछताछ करना चाहते हैं कि क्या एसपीजी अधिनियम का उल्लंघन हुआ है और फिर आप राज्य के सीएस और डीजी को दोषी मानते हैं। किसने उन्हें दोषी ठहराया?
जस्टिस सूर्यकांत: डीजी और सीएस हमारे सामने पार्टी हैं और हमें पता चलेगा कि चूक के लिए कौन जिम्मेदार है? राज्य और याचिकाकर्ता निष्पक्ष सुनवाई चाहते हैं और आप निष्पक्ष सुनवाई के खिलाफ नहीं हो सकते तो ये प्रशासनिक और fact finding enquiry आपके द्वारा ही क्यों?
जस्टिस सूर्यकांत: हां, सुरक्षा उल्लंघन हुआ है और राज्य ने भी इसे स्वीकार किया है। लेकिन, अन्य मुद्दे तथ्यों के सवाल हैं और इसे एक स्वतंत्र व्यक्ति द्वारा देखा जाना चाहिए।
जस्टिस कोहली: जब आपने नोटिस जारी किया तो यह हमारे आदेश से पहले था और उसके बाद हमने अपना आदेश पारित किया। आप उनसे 24 घंटे में जवाब देने के लिए कह रहे हैं, यह आपसे अपेक्षित नहीं है।
CG: आपसे उम्मीदें हैं। ये थोड़ा कठोर हो सकता है।
CG: डीजीपी के अलावा.. चूंकि वे नियमों के तहत जिम्मेदार हैं।
CG: इस कारण बताओ नोटिस का आधार यह है कि ब्लू बुक में एक प्रावधान है कि महानिदेशक और खुफिया अधिकारी जिम्मेदार हैं। इसको लेकर कोई विवाद नहीं है। नाकाबंदी के बारे में कोई पूर्व चेतावनी नहीं थी, यदि नियम कहते हैं कि डीजीपी जिम्मेदार हैं तो ये ब्लू बुक के अनुसार है।
CJI: अगर आप राज्य के अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना चाहते हैं तो इस अदालत को क्या करना बाकी है?
CG: यह राज्य द्वारा तय नहीं किया जा सकता है। कैबिनेट सचिव, डीजी, एसपीजी आदि की समिति के सदस्यों को इस पर गौर करने दें और 3 सप्ताह में रिपोर्ट दें।
CJI: अगर किसी पर दोष मढ़ने से मुख्य मुद्दा खत्म हो गया है... तो हम क्या करें?
CG: ये पीएम की सुरक्षा का मामला है, इसलिए केंद्र सरकार के अधिकारियों को जांच की अनुमति दी जानी चाहिए।
CJI: कृपया, ये धारणा में ना बनाएं कि हम इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसके बाद तीनों जजों ने आपस में चर्चा की।
CJI: हम जारी किए गए जांच नोटिस की समय-सीमा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और ये भी देख रहे हैं कि आगे किसे जांच करनी है।
पटवालिया: केंद्र सरकार की समिति में तीन सदस्य होते हैं। एक कैबिनेट सचिव, फिर आईजी एसपीजी और आईबी के निदेशक होते हैं। गृह मंत्रालय प्रमुख इसका नेतृत्व कर रहे हैं और उनकी प्रथम दृष्टया राय है कि मैं पहले से ही दोषी हूं। एक स्वतंत्र कमेटी गठित की जाए। मुझे इस कमेटी से कोई उम्मीद नहीं है। मैं किस चेहरे के साथ समिति के सामने जाऊं। 
CJI: सुप्रीम कोर्ट से एक सेवानिवृत्त जज जांच समिति का नेतृत्व करेंगे। सदस्य वही होंगे, जैसा हमने संकेत दिया था- डीजीपी चंडीगढ़, आईजी एनआईए और रजिस्ट्रार जनरल और अतिरिक्त डीजी इंटेलिजेंस ब्यूरो।
पटवालिया : कृपया, जांच पूरी होने तक समिति के कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाई जाए।
CJI: सभी पूछताछ बंद करनी होगी। हम जल्द ही एक आदेश पारित करेंगे।
CG: ब्लू बुक के अनुसार, सुरक्षा चूक में आईजी इंटेलिजेंस जिम्मेदार हैं। वह खुद जांच का विषय हो सकते हैं। वह जांच कमेटी का हिस्सा हैं।
CJI: क्या ADDG इंटेलिजेंस शामिल थे?
पटवालिया: हां, वह व्यवस्था में शामिल थे। एडीडीजीपी सुरक्षा इस मामले में सक्षम प्राधिकारी हैं।
पटवालिया : क्या इस मुद्दे को लंबित रखा जाएगा?
CJI: हां,
पटवालिया : बहुत आभारी।

पहले सुरक्षा संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा था
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पीएम की सुरक्षा से संबंधित रिकॉर्ड पंजाब हरियाणा हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार को सौंपने का निर्देश जारी किए थे। इसके साथ ही पंजाब सरकार, राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसी से कहा था कि वो सुरक्षा संबंधित रिकॉर्ड रजिस्ट्रार जनरल को सौंपें। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की बनाई गई समिति को सोमवार तक जांच रोकने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही चंडीगढ़ के डीजी और एनआईए के एक अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया है।

अगली सुनवाई तक जांच पर लगाई थी रोक
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की तीन सदस्‍यीय बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस मामले में कोर्ट ने पंजाब सरकार के वकील और केंद्र सरकार के वकील से कहा है कि उन्होंने जांच के लिए अलग-अलग जो कमेटी बना रखी हैं, वो सोमवार तक काम रोक दें। बता दें कि केंद्र और राज्य सरकार ने सुरक्षा में चूक के मामले की जांच के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई हैं। दोनों सरकारें एक-दूसरे की जांच समिति पर सवाल उठा रही हैं। इस केस में एनआईए को भी जांच में शामिल करने के निर्देश दिए थे।

दोबारा ऐसी चूक ना हो, याचिका में मांग की गई
सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि मामला पीएम की सुरक्षा से संबंधित है। ऐसे में उचित होगा कि सभी रिकॉर्ड को पंजाब हरियाणा हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार अपने कब्जे में लें। पंजाब सरकार और केंद्र सरकार की संबंधित एजेंसी सहयोग करें और तमाम रिकॉर्ड तुरंत रजिस्ट्रार जनरल के हवाले किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सोमवार को आगे की सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में मनिंदर सिंह नाम के शख्स ने याचिका लगाई है और मांग की है कि ऐसा दोबारा ना हो, यह सुनिश्चित किया जाए। मनिंदर सिंह खुद सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। उन्होंने कहा कि घटना की तुरंत न्यायिक जांच होनी चाहिए।

क्या है मामला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 5 जनवरी को पंजाब दौरा था। वे फिरोजपुर में जनसभा को संबोधित करने जा रहे थे। लेकिन, मौसम खराब होने की वजह से पीएम ने सड़क मार्ग से जाना तय किया। जब पीएम का काफिला फिरोजपुर के पास हुसैनीवाला स्थित शहीद स्मारक पार्क जा रहा था तो एक फ्लाइओवर पर फंस गया। यहां कार्यक्रम स्थल से 30 किमी पहले फ्लाइओवर पर किसानों के एक जत्थे ने जाम लगा दिया था। इस कारण काफिले को 20 मिनट तक फ्लाइओवर पर ही रुकना पड़ा। इसे प्रधानमंत्री के सुरक्षा में बड़ी चूक माना गया है, क्योंकि पाकिस्तान की सीमा वहां से सिर्फ 12 किमी दूर है।

गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया था 
इस मामले में गृह मंत्रालय का कहना था कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के बारे में पंजाब सरकार को पहले ही बता दिया गया था। उन्हें इससे जुड़े इंतजाम करने थे, जो नहीं किए गए। गृह मंत्रालय ने कहा कि जब रूट बदला गया तो पंजाब सरकार को सूचना दी गई। डीजीपी की क्लियरेंस मिलने के बाद ही पीएम की फ्लीट आगे बढ़ी। पंजाब सरकार को अतिरिक्त सुरक्षा तैनाती करनी थी, ताकि सड़क मार्ग से यात्रा सुरक्षित रहे, लेकिन अतिरिक्त इंतजाम नहीं किए गए। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि पंजाब सरकार ने सुरक्षा से जुडे़ ‘ब्लू बुक’ नियमों का पालन नहीं किया है। एसपीजी का काम प्रधानमंत्री की रक्षा के लिए घेराव करना होता है लेकिन बाकी की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य की होती है। मंत्रालय ने इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट देने को भी कहा है।

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