
बेंगलुरू. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक के दो दिवसीय दौरे पर है। दौरे के दौरान पीएम मोदी ने भारतीय वैज्ञानिक कांग्रेस के 107 वें सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि नए साल और नए दशक की शुरुआत में मेरे पहले कार्यक्रमों में से एक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से जुड़ा है। यह कार्यक्रम बेंगलुरु में हो रहा है, जो विज्ञान और नवाचार से जुड़ा हुआ शहर है।
हम 'ईज ऑफ डूइंग साइंस' के लिए प्रयासरत हैं। लाल फीताशाही हटाने के लिए हम इंफर्मेशन टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग सुधरकर 52 तक पहुंची है।
4 स्टेप पर बढ़ना होगा आगे
इनोवेट- पेटेंट - प्रोडेक्शन- प्रोस्पर
पीएम ने कहा कि न्यू इंडिया को टेक्नोलॉजी भी चाहिए और लॉजिक भी। भारत के समाज को जोड़ने का काम साइंस के द्वारा किया जा सकता है। आज भारत में सस्ते फोन बन रहे हैं, इसकी पहुंच हर किसी के पास है और गरीब भी सरकार से जुड़ सकता है। पिछले पांच साल में रुलर डेवलेपमेंट के विकास को देश ने महसूस किया है, स्वच्छ भारत-आयुष्मान भारत इसका उदाहरण हैं।
पीएम मोदी बोले कि हमारी सरकार ने देश के 6 करोड़ किसानों को एक साथ सम्मान निधि का पैसा ट्रांसफर किया, ये सब विज्ञान की वजह से हुआ। आधार टेक्नोलॉजी की वजह से ये संभव हुआ, हर परिवार तक बिजली-शौचालय-गैस सिलेंडर किसे देना है, इसकी पहचान टेक्नोलॉजी की वजह से हुई।
आप समाधान देंगे, उसे हम जमीन पर उतारेंगे
पीएम मोदी ने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए दुनिया के वैज्ञानिकों को प्रयोगशालाओं में प्लास्टिक का विकल्प खोजना होगा। खेती के विकास के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा के उत्पादन पर बल देने की जरूरत है। सप्लाई चेन में जो नुकसान होता है, उसे रोकने के लिए टेक्नोलॉजी बहुत जरूरी है। हमें मध्यम और लघु उद्योगों को भी मजबूत करना है। देश ने सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति का संकल्प लिया है, ताकि हमारे पशु, मछलियों और मिट्टी को बचाया जा सके। लेकिन, प्लास्टिक का विकल्प तो आपको ही खोजना होगा। इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से मेटल निकालने के लिए भी नई तकनीक की जरूरत है। आप जो समाधान देंगे, उसे हम बाजार में उतार पाएंगे, जिसे मध्यम और लघु उद्योगों का विकास होगा।”
“फसलों के अवशेष और घरों से निकलने वाला कचरा भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। इसको वेल्थ में बदलने के लिए हमें मेहनत करनी होगी। 2020 तक कच्चे तेल का आयात कम करने का लक्ष्य है, इसके कई विकल्प हमें तलाशने होंगे। आपका यही सब योगदान देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा।”
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