
नई दिल्ली. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 1000 करने और राज्यसभा की सीटों में भी बढोत्तरी करने की बात कही है। मुजर्खी ने कहा कि भारत में निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए निर्वाचन क्षेत्र अनुपातहीन रूप से बड़ा है। इंडिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित दूसरा अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति व्याख्यान देते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने सत्तारूढ़ दलों को 'बहुसंख्यकवाद' के खिलाफ आगाह किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें संख्यात्मक बहुमत दिया होगा लेकिन अधिकतम मतदाताओं ने कभी किसी एक पार्टी को समर्थन नहीं दिया।
चुनावों में बहुमत एक स्थिर सरकार बनाने का अधिकार
उन्होंने कहा कि 1952 से लोगों ने अलग-अलग पार्टियों को मजबूत जनादेश दिया है, लेकिन कभी भी एक पार्टी को 50 फीसदी से ज्यादा वोट नहीं दिए हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, 'चुनावों में बहुमत आपको एक स्थिर सरकार बनाने का अधिकार देता है। पूर्व राष्ट्रपति ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने पर अपना संदेह भी जताया। उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक संशोधनों के बाद किया जा सकता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि निर्वाचित सदस्य भविष्य में किसी सरकार पर भरोसा नहीं खोएंगे।
1000 कर दिया जाना चाहिए लोस की सीटें
उन्होंने कहा कि लोकसभा की क्षमता को 1977 में संशोधित किया गया था जो 1971 की जनगणना के आधार पर किया गया था और उस वक्त देश की आबादी 55 करोड़ थी। उन्होंने कहा कि आबादी तब से दोगुने से ज्यादा बढ़ गई है और परिसीमन पर लगी रोक को हटाने के लिए यह मजबूत दलील है। उन्होंने कहा कि आदर्श रूप से इसे (लोकसभा में सदस्यों की संख्या) बढ़ा कर 1000 कर दिया जाना चाहिए।
नए संसद भवन बनाए जाने पर भी उठाया सवाल
वर्ष 2012 से 2017 तक राष्ट्रपति रहे मुखर्जी ने नया संसद भवन बनाए जाने के पीछे के तर्क पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मुझे बहुत हैरानी होती है कि नए संसद भवन से भारत में संसदीय व्यवस्था के कामकाज में कैसे मदद मिलेगी या सुधार होगा।' मुखर्जी ने कहा कि अगर लोकसभा की सीटें बढ़कार 1000 की जाती है तो सेंट्रल हॉल को निचला सदन बनाया जा सकता है और राज्यसभा को मौजूदा लोकसभा में स्थानांतरित किया जा सकता है। इंडियन फाउंडेशन की ओर से आयोजित व्याख्यान में मुखर्जी ने वाजपेयी की आम सहमति बनाने वाले नेता के तौर पर तारीफ की। मुखर्जी ने कहा कि वाजपेयी ने सबको साथ लेकर काम किया।
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