
नई दिल्ली. संसद में हाल में पारित किए गए दो कृषि बिलों के खिलाफ किसान संगठनों ने शुक्रवार को भारत बंद बुलाया है। इस विरोध प्रदर्शन में पंजाब और हरियाणा के ज्यादा किसान शामिल होने जा रहे हैं। इसके अलावा देश के 31 किसान संगठनों ने इस बंद का समर्थन किया है। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि कृषि बिलों के खिलाफ भारत बंद को उसका पूर्ण समर्थन रहेगा। पंजाब में इस बिल का विरोध काफी पहले से जारी है। भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहण) के महासचिव सुखदेव सिंह ने पंजाब के दुकानदारों से अपील की है कि भारत बंद पर वे अपनी दुकानें बंद रखें और किसानों का समर्थन करें।
पंजाब में गुरुवार को किसानों ने तीन दिन तक रेल यातायात ठप करने का अभियान चलाया। किसान कई जगह रेल लाइनों पर बैठ गए हैं। पंजाब के किसानों ने यह भी कहा है कि सरकार अगर उनकी बात नहीं मानती है तो 1 अक्टूबर से अनिश्चितकाल के लिए रेल यातायात ठप किया जाएगा। हरियाणा में भी कमोबेश यही हाल है। हरियाणा भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख गुरनाम सिंह ने मीडिया से कहा कि बीकेयू के अलावा और भी कई किसान संगठनों ने भारत बंद का समर्थन किया है। गुरनाम सिंह ने कहा कि उन्होंने किसानों से अपील की है कि शांतिपूर्वक सड़कों और स्टेट हाइवे पर बैठ कर धरना प्रदर्शन करें. गुरनाम सिंह के मुताबिक नेशनल हाइवे पर किसी प्रकार के धरना प्रदर्शन की अपील नहीं की गई है। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाले धरना प्रदर्शन में किसी को हिंसक काम करने की इजाजत नहीं होगी।
भारत बंद को कई पार्टियों का समर्थन
किसानों की ओर से बुलाए गए इस बंद का कांग्रेस ने पूरा समर्थन किया है। कांग्रेस पार्टी ने कहा कि शुक्रवार को भारत बंद में उसके लाखों कार्यकर्ता किसानों के साथ धरना में शामिल होंगे। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने भी किसान आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है। उधर पंजाब में आम आदमी पार्टी ने पहले ही ऐलान किया है कि वह भारत बंद का समर्थन करेगी। लगभग 30 किसान संगठन भारत बंद पर सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।
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