
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार सुबह तीन देशों (जापान, पापुआ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया) की यात्रा कर दिल्ली लौट आए। दिल्ली आते ही उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया है। पीएम ने देहरादून-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन (Vande Bharat Express Train) को हरी झंडी दिखाई। इससे दिल्ली से देहरादून की यात्रा सिर्फ साढ़े चार घंटे में हो सकेगी।
नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। यह उत्तराखंड को मिली पहली वंदे भारत ट्रेन है। इससे उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में नई विद्युतीकृत रेल लाइन खंडों को भी राष्ट्र को समर्पित किया। इससे राज्य का पूरा रेल मार्ग 100 प्रतिशत विद्युतीकृत हो गया है। इस अवसर पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले की सरकारें परिवारवाद में सिमटी रहीं। उन्होंने घोटाले करने पर ध्यान दिया।
नरेंद्र मोदी बोले- भारत ने जगा दिया है पूरी दुनिया का विश्वास
नरेंद्र मोदी ने कहा, "दिल्ली और देहरादून के बीच चलने वाली यह ट्रेन देश की राजधानी को देवभूमि से और तेज गति से जोड़ेगी। वंदे भारत से दिल्ली-देहरादून के बीच रेल सफर में अब समय कम लगेगा। इस ट्रेन की गति तो अपनी जगह है ही जो सुविधाएं हैं वो भी सफर को आनंददायक बनाने वाली हैं।"
नरेंद्र मोदी ने कहा, "अभी मैं तीन देशों की यात्रा कर लौटा हूं। आज पूरा विश्व भारत को बहुत उम्मीदों से देख रहा है। हम भारत के लोगों ने जिस तरह अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, जिस तरह हम गरीबी से लड़ रहे हैं उसने पूरी दुनिया का विश्वास जगा दिया है। विश्व के लोग भारत को समझने और देखने के लिए आना चाहते हैं। ऐसे में उत्तराखंड जैसे सुंदर राज्यों के लिए ये बहुत बेहतरीन अवसर है। इसका पूरा लाभ उठाने में वंदेभारत ट्रेन मदद करने वाली है।"
विश्व के आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगी देवभूमि
पीएम ने कहा, "उत्तराखंड देवभूमि है। जब मैं बाबा केदार के दर्शन करने गया था तो दर्शन के बाद अनायास ही मेरे मुख से कुछ पंक्तियां निकलीं थीं। ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। मेरा विश्वास है कि देवभूमि आने वाले समय में पूरे विश्व के आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगी।"
परिवारवाद के अंदर सिमटे दलों ने नहीं समझी देश की जरूरतें
नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाकर और तेजी से विकसित हो सकता है। पहले लंबे समय तक जिन दलों की सरकारें रहीं उन्होंने देश की इस जरूरत को नहीं समझा। उन दलों का ध्यान घोटालों और भ्रष्टाचार पर था। वो परिवारवाद के अंदर सिमटे हुए थे। परिवारवाद के बाहर निकलना उनकी ताकत नहीं थी। भारत में हाई स्पीड ट्रेनों को लेकर पहले की सरकारों ने बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन वे रेल नेटवर्क से मानव रहित फाटक तक हटा नहीं पाए। रेलवे के बिजलीकरण की स्थिति और भी गंभीर थी। 2014 तक देश की एक तिहाई रेल नेटवर्क का बिजलीकरण हो पाया था। हमने रेलवे को ट्रांसफॉर्म करने के लिए चौतरफा काम किया।"
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