
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम ने ऐलान किया कि आने वाले दिनों में सभी सीबीएसई स्कूलों में एक ही पाठ्यक्रम लागू होगा। उन्होंने बताया कि देश में 10+2 एजुकेशन सिस्टम की जगह 5+3+3+4 शिक्षा प्रणाली लाई जा रही है।
अखिल भारतीय शिक्षा समागम में पीएम मोदी ने कहा, "आज 21वीं सदी का भारत, जिन लक्ष्यों को लेकर आगे बढ़ रहा है, उसमें हमारी शिक्षा व्यवस्था का बहुत ज्यादा महत्व है। शिक्षा में देश को सफल बनाने और देश का भाग्य बदलने की ताकत होती है। एक ओर हमारी शिक्षा व्यवस्था भारत की प्राचीन परम्पराओं को सहेज रही है तो दूसरी तरफ आधुनिक साइंस और हाईटेक टेक्नोलॉजी की फील्ड में भी हम उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।"
25 सालों में ऊर्जा से भरी युवा पीढ़ी का निर्माण करना है
नरेंद्र मोदी ने कहा, "राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ट्रेडिशनल नॉलेज सिस्टम से लेकर भविष्य की टेक्नोलॉजी तक को बराबर अहमियत दी गई है। युवाओं को उनकी प्रतिभा की जगह उनकी भाषा के आधार पर जज किया जाना सबसे बड़ा अन्याय है। मातृभाषा में पढ़ाई होने से भारत के युवा टेलेंट के साथ अब असली न्याय की शुरुआत होने जा रही है। आने वाले 25 सालों में हमें ऊर्जा से भरी एक युवा पीढ़ी का निर्माण करना है।"
युवाओं को एक जैसे अवसर देना है राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विजन
पीएम मोदी ने कहा, "राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विजन युवाओं को एक जैसे अवसर देना है। इसकी एक बड़ी प्राथमिकता ये है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहे। इसे प्रैक्टिकल लर्निंग का हिस्सा बनाया जाए। आज दुनिया जानती है कि जब सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी की बात आएगी तो भविष्य भारत का है। जब स्पेस टेक की बात होगी तो भारत की क्षमता का मुकाबला आसान नहीं है। जब डिफेंस टेक्नोलॉजी की बात होकी तो भारत का लो कॉस्ट और बेस्ट क्वालिटी का मॉडल ही हिट होगा।"
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बच्चों को खुली उड़ान का मौका दें
नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं शिक्षकों और अभिभावकों से कहना चाहूंगा कि बच्चों को हमें खुली उड़ान का मौका देना है। हमें उनके भीतर आत्मविश्वास भरना है ताकि वे हमेशा कुछ नया सीखने और करने का साहस कर सकें। हमें भविष्य पर नजर रखनी होगी, हमें फ्यूचरिस्टिक माइंडसेट के साथ सोचना होगा। बच्चों को किताबों के दबाव से मुक्त करना होगा। भारत जैसे-जैसे मजबूत हो रहा है भारत की पहचान और परम्पराओं में भी दुनिया का दिलचस्पी बढ़ रही है। हमें इस बदलाव को वश्व की अपेक्षा के तौर पर लेना होगा। योग, आयुर्वेद, कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में भविष्य की अपार संभावनाएं जुड़ी हैं।"
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