उत्तराखंड चुनाव से पहले राजनीति से संन्यास ले सकते हैं हरीश रावत, 5 जनवरी को कर सकते हैं बड़ा ऐलान...

Published : Dec 22, 2021, 03:22 PM ISTUpdated : Dec 22, 2021, 06:49 PM IST
उत्तराखंड चुनाव से पहले राजनीति से संन्यास ले सकते हैं हरीश रावत, 5 जनवरी को कर सकते हैं बड़ा ऐलान...

सार

उत्तराखंड चुनाव (Uttakhand election  2022) से पहले कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत (Harish Rawat) पार्टी से नाराज हो गए हैं। पंजाब और छत्तीसगढ़ का मुद्दा सुलझा ही था कि रावत के ट्वीट से पार्टी में फिल हलचल पैदा हो गई है। अब पूर्व सीएम हरीश रावत के संन्यास की खबर चल निकली है।

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttakhand election  2022) से पहले कांग्रेस (Congress) के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) की नराजगी बुधवार को सामने आई। उन्होंने ट्विटर पर अपने 'मन की बात' रखी। कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए 72 वर्षीय नेता ने लिखा कि बहुत तैर लिए, अब विश्राम का समय है। रावत के इस ट्वीट ने उनके राजनीति से संन्यास के संकेत दिए हैं। लेकिन चुनाव से ऐन पहले रावत का यह रुख पार्टी को बड़े संकट में डाल सकता है। चर्चा है कि रावत पार्टी से नाराज हैं और 5 जनवरी को राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर सकते हैं। हरीश रावत के करीबी सूत्रों के मुताबिक वो आने वाले दिनों में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई बड़ा फैसला कर सकते हैं। 


ट्विटर पर लिखा - उनके मुमाइंदे मेरे हाथ पांव बांध रहे हैं
कांग्रेस के चुनाव प्रचार कमेटी के अध्यक्ष रावत ने ट्वीट किया - है न अजीब सी बात... चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। रावत ने लिखा - जिस समुद्र में तैरना है। सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिए, अब विश्राम का समय है! फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है 'न दैन्यं न पलायनम्'  बड़ी उपापोह की स्थिति में हूं...नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि  भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।#Uttarakhand @INCUttarakhand


किसी का नाम लिए बिना मन की बात 
रावत ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में उन्होंने बताने की कोशिश की है कि कांग्रेस संगठन को लेकर वो खुश नहीं हैं। उन्होंने हाथ बांधे जाने की बात लिखी है, जिससे साफ है कि वे अपने हिसाब से उत्तराखंड में भी काम नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि ये सवाल निरुत्तर हे कि हरीश रावत का हाथों को किसने बांध रखा है। 


कहीं प्रेशर पॉलिटिक्स तो नहीं... 
रावत के ट्वीट के बाद तरह तरह की चर्चाएं चल निकली हैं। यह भी कहा जा रहा है कि हरीश रावत खुद को सीएम फेस घोषित करवाए जाने के लिए प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे हैं। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रभारी देवेंद्र यादव ने हरीश रावत की नाराजगी को लेकर कहा कि वो सीनियर नेता हैं। उनसे हमारी बात नहीं हुई है। उधर, रावत के ट्वीट को  लेकर कांग्रेस की तरफ से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पंजाब में कांग्रेस को संभालने पहुंचे थे रावत 
हरीश रावत कांग्रेस के पुराने सिपाहियों में से एक हैं। पंजाब में कैप्टन और सिद्धू के बीच चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच पार्टी ने उन्हें सब कुछ ठीक करने की जिम्मेदारी दी थी। सियासी सरगर्मियों के बीच रावत ने वहां काफी कुछ ठीक करने की कोशिश की। लेकिन अपने ही प्रदेश में वे नाराज दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि रावत की मर्जी के बिना उत्तराखंड में कांग्रेस चुनाव के लिए टीम गठित की गई है। इसलिए वे संगठन से असंतुष्ट हैं। रावत उत्तराखंड में चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष हैं। उनके करीबी माने जाने वाले गोदियाल को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि रावत के धुर विरोधी माने जाने वाले प्रीतम सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया था। 

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