
Rahul Gandhi Video. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बातचीत का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस क्लिप में राहुल गांधी शिव और विष्णु भगवान के दर्शन पर बोल रहे हैं। इस दौरान उन्होंने जन्म और मृत्यु को लेकर जिस तरह की बातें कहीं, उससे यूजर्स कांग्रेस नेता की आलोचना कर रहे हैं।
जन्म-मृत्यु की दार्शनिक अवधारणा प मचा बवाल
वायनाड के सांसद राहुल गांधी के वायरल वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि वे जीवन और मृत्यु की दार्शनिक अवधारणा बता रहे हैं। जिसकी सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना की जा रही है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के युवा छात्रों के साथ बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने उत्पादन के लोकतांत्रिक मॉडल और हर बात को गहराई से सुनने के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने भारत की समृद्ध दार्शनिक और आध्यात्मिक परंपराओं के बारे में बात की है लेकिन उनके विचारों पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
राहुल गांधी से क्या सवाल किया गया
राहुल गांधी से पूछा गया कि क्या आपकी रूचि दर्शनशास्त्र में है। पश्चिम के कल्चर में व्यक्ति पर जोर दिया जाता है, जैसे कि हमें यह सब जानने की जरूरत है। यदि आपको पश्चिमी समाज की व्याख्या करनी हो तो कैसे करेंगे। हम पश्चिमी समाज के नेताओं से इन विषयों पर नहीं सुनत हैं। आप क्या कहना चाहेंगे।
राहुल गांधी ने क्या जवाब दिया
इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि क्या आप भारत में दो केंद्रीय दर्शनों को जानते हैं? पश्चिम में यहूदी-ईसाई धर्म में एक बात कॉमन है कि आप पैदा होते हैं, आप मरते हैं। आप सभी सोचते हैं कि आप मर जाते हैं, ठीक है? हर कोई सोचता है कि आप मर गए और हर कोई सोचता है कि आप पैदा हुए थे, है ना? लेकिन भारत में दो दर्शन हैं जिसमें से एक कहता है कि आप कभी नहीं मरते हैं। दूसरा कहता है कि आप कभी पैदा नहीं होते। शिव का दर्शन कहता है कि आपका कभी जन्म नहीं हुआ और आपका अस्तित्व नहीं है। जबकि विष्णु का दर्शन कहता है कि आप कभी मरते ही नहीं हैं। सब इधर-उधर से भागकर उन्हीं में समाहित हो जाते हैं।
राहुल गांधी ने दिया उदाहरण
राहुल गांधी ने आगे कहा कि यदि आप उनसे पूछें कि आपके मरने के बाद क्या होता है, तो कहा जाएगा कि पुनर्जन्म लेता है। भारत में कुछ बहुत ही दिलचस्प दार्शनिक संरचनाएं हैं। भारत में दलित लोगों को मूल रूप से बताया जाता है कि उनका अस्तित्व ही नहीं है। इसलिए वह पूरी तरह से अलग-थलग हैं और वह उस अलगाव में काम कर रहे हैं। आप हर दिन उनके दर्द की कल्पना करें क्योंकि उन्हें अपमानित किया जा रहा है। इसका असर उनकी संरचना पर हो रहा है। इसलिए सुनने का मतलब यह नहीं कि अपना कान खोल दें बल्कि यह कि ध्यान से सुनें, देखें और महसूस करें।
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