
जयपुर. मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अशोक गहलोत सरकार से नाराज चल रहे हैं। वे राज्य के किसी भी नेता का फोन भी नहीं उठा रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पायलट के पास 30 कांग्रेसी विधायक और कुछ निर्दलीय विधायकोंं को समर्थन है। ये सभी विधायक हर फैसले में पायलट का साथ देने के लिए तैयार हैं।
उधर, पायलट के साथ दिल्ली गए कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने कहा, हम दिल्ली निजी कारणों के चलते गए थे। अगर मीडिया यह कहती है कि हम किसी और वजह से गए हैं, तो यह हमारी समस्या नहीं है। हम किसी विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते। हम कांग्रेस के सिपाही हैं और आखिरी सांस तक पार्टी के साथ रहेंगे।
एक अन्य कांग्रेस विधायक दानिश अबरार ने कहा, सचिन पायल हमारे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं और मैं सचिव हूं। हमारी मीटिंग सामान्य थी। हम चेतन, रोहित बेहरा और मुझसे भाजपा ने संपर्क नहीं किया।
सीएम और डिप्टी सीएम के बीच चल रही अनबन
राजस्थान सरकार में कुछ ठीक नहीं चल रहा। इसका कारण है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच अनबन है। इस संकट पर आलाकमान की चुप्पी को लेकर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा, क्या हम तब जाएंगे? जब हमारे घोड़े अस्पतबल से निकल जाएंगे।
पायलट नाराज, 24 विधायकों के साथ दिल्ली में डारा डेला
बताया जा रहा है कि सचिन पायलट अभी 24 विधायकों के साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। वे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। यह भी बताया जा रहा कि पायलट ने राज्य के किसी भी नेता का फोन नहीं उठाया है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट में पायलट के साथ 15 विधायक होने की भी बात कही जा रही है।
गहलोत ने लगाए भाजपा पर आरोप
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर सरकार को गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं दो लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इन्होंने कांग्रेस विधायकों को 25 करोड़ रुपए देने की पेशकश की। जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में गहलोत से पायलट की नाराजगी को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा, कौन मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता। हमारी पार्टी में 4-5 मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। लेकिन बन तो एक ही सकता है।
क्या मध्यप्रदेश जैसी बन सकती है स्थिति?
मध्यप्रदेश में इसी तरह से मार्च में बड़ा सत्ता परिवर्तन देखने को मिला था। जब कांग्रेस से नाराज चल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 21 विधायकों के साथ भाजपा का दामन थामा था। इसके बाद कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा था। दरअसल, सिंधिया और पायलट दोनों के बीच काफी अच्छे रिश्ते हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश जैसी स्थिति बनने की खबरों को ज्यादा हवा मिल रही।
क्या है विधानसभा की स्थिति?
विधानसभा की मौजूदा स्थिति देखें तो अभी माहौल कांग्रेस के पक्ष में है। हालांकि, मध्यप्रदेश की तरह कांग्रेस राजस्थान को हल्के में लेने की भूल नहीं कर सकती। राजस्थान में कांग्रेस के पास निर्दलीय और अन्य को मिलाकर 121 का समर्थन प्राप्त है। वहीं, भाजपा के पास 72 विधायक हैं। भाजपा को राज्य में सरकार बनाने के लिए 101 विधायक चाहिए। ऐसे में यह आसान नहीं आता।
हालांकि, अगर सचिन पायलट अपने साथ 24 विधायकों को लेकर टूटते हैं और कुछ निर्दलीय भाजपा को समर्थन दें तो मध्यप्रदेश जैसी स्थिति बन सकती है।
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