
जयपुर. कांग्रेस में सियासी घमासान जारी है। इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 31 जुलाई को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र को संसोधित प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, गहलोत ने इससे पहले भी प्रस्ताव भेजा था, लेकिन राज्यपाल ने इसे लेकर 6 आपत्तियां दर्ज कराई थीं। कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ स्पीकअप फॉर डेमोक्रेसी अभियान शुरू किया है।
उधर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा के खिलाफ स्पीकअप फॉर डेमोक्रेसी अभियान में समर्थन देने की अपील की। राहुल ने ट्विटर पर वीडियो जारी किया। इसमें कहा गया है कि राजस्थान में भाजपा कांग्रेस सरकार गिराने की कोशिश कर रही है। ऐसा ही उन्होंने मध्यप्रदेश में किया था। हम राजस्थान विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करते हैं।
देशभर में राज्यपाल के घरों के आगे कांग्रेस करेगी प्रदर्शन
कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, आज तक के लोकतांत्रिक इतिहास में कभी भी विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस को रोका नहीं गया और ऐसा भी कभी नहीं हुआ कि चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार विधानसभा का सत्र बुलाना चाहती है और उसके अंदर रूकावटें पैदा की जा रही हैं। इसके विरोध में कल कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता पूरे देश के अंदर सभी राज्यों में वहां के राज्यपाल के घरों के आगे प्रदर्शन करेंगे और ये मांग करेंगे कि राजस्थान में लोकतंत्र को बचाया जाए और केंद्र सरकार से कहेंगे कि राजस्थान में राजभवन को कहा जाए कि वो यहां जल्दी विधानसभा का सत्र बुलाए।
भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने एक बार फिर राज्य की गहलोत सरकार पर निशाना साथा। उन्होंने लिखा, जनता सब देख रही है, ईश्वर भी साक्षी है। आपका ईमान कैसे गवाही दे रहा है? कुर्सी की भूख ने आपको लोभी बना दिया है। कोरोना ही नहीं अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं, क्या बाड़े में बैठे रहना ही लोकतंत्र है? शासन है? कांग्रेस बताए कब बाड़े से निकलेगी?
इससे पहले शनिवार को भाजपा के 13 सदस्य राज्यपाल से मिलने पहुंचे। यहां भाजपा ने राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन सौंपते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। भाजपा मुख्यमंत्री के खिलाफ राजभवन के घेराव वाले बयान पर कार्रवाई की मांग कर रही है।
क्यों विधानसभा सत्र बुलाना चाहते हैं गहलोत
गहलोत लगातार विधानसभा सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं। जबकि राज्यपाल ने कोरोना संकट के चलते सत्र बुलाने के पक्ष में नहीं हैं। दरअसल, सत्र बुलाकर गहलोत व्हिप जारी करना चाहते हैं। इसमें जो बागी विधायक बिल के खिलाफ वोट करेंगे, उनकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। 19 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद गहलोत सरकार सुरक्षित हो जाएगी।
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